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मेडिकल कॉलेजों में 50% आरक्षण

जबलपुर.राज्य सरकार के आरक्षण संबंधी इस बयान को मद्देनजर रखते हुए चीफ जस्टिस एके पटनायक और जस्टिस संजय यादव की युगलपीठ ने चार छात्रों की ओर से दायर याचिका का निराकरण कर दिया। बसंत अहिरवार व अन्य की ओर से दायर इस याचिका में कहा गया था कि वर्ष 2007 की परीक्षा में उन्हें 80 से 84 फीसदी अंक मिले थे, लेकिन प्रायवेट मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण के प्रावधान का पालन न होने के कारण उन्हें प्रवेश नहीं मिल सका।

याचिका में कहा गया था कि राज्य सरकार ने 21 मई 2007 को एक अध्यादेश बनाया और फिर 2 अगस्त 2007 को अधिनियम भी बना दिया गया था। इसके बाद भी निजी मेडिकल कॉलेजों में आरक्षण के प्रावधान का पालन न होने पर यह याचिका दायर की गई थी। मामले पर हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता आदित्य संघी ने अदालत को बताया कि राज्य सरकार का यह रवैया भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15.4 का उल्लंघन है और वह निर्धारित 50 फीसदी आरक्षण के प्रावधान का पालन नहीं कर रही है। दो दिन पूर्व हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से कहा था कि वह याचिका में लगाए गए आरोपों के संबंध में स्थिति स्पष्ट करे।

आज सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि इस साल से निजी मेडिकल कॉलेजों में होने वाले एडमीशनों में आरक्षण लागू होगा। सरकार के जवाब को सुनकर अदालत ने याचिका का निराकरण कर दिया।

डीमेट परीक्षा पालन किया जाएगा आरक्षण अधिनियम

सरकार ने आज हाईकोर्ट को भरोसा दिलाया है कि डीमेट परीक्षा के बाद होने वाले एडमीशन के दौरान 50 फीसदी आरक्षण के लिए बनाए गए अधिनियम का पालन किया जाएगा। इसके तहत अजा को 16, अजजा को 20 और अन्य पिछड़ा वर्ग को 14 फीसदी कोटे का प्रावधान किया गया है।





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