जयपुरगुर्जर, बंजारा, रेबारी, गाड़िया लुहारों को 5 फीसदी विशेष आरक्षण और सवर्ण वर्ग की जातियों को आर्थिक आधार पर 14 प्रतिशत आरक्षण देने वाले विधेयक पर राजस्थान विधानसभा ने बुधवार को अपनी मुहर लगा दी। विधेयक को कानूनी पचड़े से बचाने के लिए इसे संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल करने का संकल्प भी पारित किया गया। कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों ने विधेयक लाने की मूल भावना का तो स्वागत किया, लेकिन विधेयक लाने के पीछे की मंशा, कानूनी और संवैधानिक खामियों पर सवाल खड़े किए। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार अपने राजनीतिक फायदे के लिए यह विधेयक लाई है, लेकिन यह ऐसा कमजोर विधेयक है, जिसका फायदा किसी वर्ग को नहीं मिलेगा।
गुर्जर आंदोलन सरकारी साजिश!
इससे पहले विधेयक पर हुई बहस में कांग्रेस के संयम लोढ़ा ने विधेयक की मूल भावना का समर्थन करते हुए कहा कि इस कानून तक पहुंचने का रास्ता बड़ा ही कष्टप्रद रहा है। उन्होंने गुर्जर आंदोलन कैसे हुआ इसकी जांच की मांग भी उठाई। कांग्रेस के मुख्य सचेतक जुबेर खान ने आरोप लगाया कि सरकार ने साजिश के तहत 23 मई को पीलूपुरा में आंदोलन कराया। इससे पहले भी षड्यंत्र के तहत दो जातियों को आपस में लड़ाने का काम किया।
पहले राय लेनी थी
बी.डी.कल्ला ने 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण देने पर ही सवाल उठाते हुए कहा कि संविधान में संशोधन किए बिना यह आरक्षण देना संभव नहीं हो पाएगा। इसलिए पहले अटार्नी जनरल की राय ली जानी चाहिए थी। सत्तापक्ष के जोगेश्वर गर्ग ने प्रतिपक्ष पर दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाते हुए इस विधेयक को ऐतिहासिक बताया और मांग की कि अनुसूचित जाति और जनजाति का आरक्षण जनसंख्या के अनुपात में बढ़ाया जाना चाहिए।
सरकारी हेलिकॉप्टर में राजद्रोही!
कांग्रेस के मोहम्मद माहिर आजाद ने विधेयक में अनुसूचित जाति, जनजाति को जोड़ने पर सवालिया निशान लगाया। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो सरकार आंदोलनकारी पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज कर रही है दूसरी तरफ उसे हेलिकॉप्टर में लाकर मुख्यमंत्री के पास बिठाया जा रहा है। डॉ.सी.पी.जोशी ने इस विधेयक को 2006 में पारित तमिलनाडु के विधेयक की कॉपी बताते हुए संवैधानिक सवाल खड़े किए।
एसटी पर लागू नहीं क्रीमिलेयर
सरकार ने आरक्षण विधेयक खंड-3 और 4 में संशोधन करके यह प्रावधान किया है कि अनुसूचित जाति व जनजाति पर क्रीमिलेयर की सीमा लागू नहीं होगी।