जयपुर.राज्य के पूर्व खाद्यमंत्री डॉ.किरोड़ीलाल मीणा ने बुधवार को राजस्थान विधानसभा से भी इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इससे पहले भी इस्तीफा दिया था। लेकिन उस समय विधानसभा अध्यक्ष ने इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था, क्योंकि वे खुद पेश नहीं हुए थे। अब डॉ. मीणा ने खुद उपस्थित होकर इस्तीफा दिया है। विधानसभा अध्यक्ष सुमित्रासिंह ने अभी उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है। उनका कहना है कि वे अभी इस्तीफे में लिखे गए तथ्यों का अध्ययन कर रही हैं।
डॉ.मीणा ने बुधवार को विधानसभा परिसर में जाकर विधानसभा अध्यक्ष से करीब 15 मिनट तक अकेले में चर्चा की। इसके बाद मीणा सीधे अपने क्षेत्र में चले गए। इससे पहले भी वे पार्टी के प्रदेश प्रभारी गोपीनाथ मुंडे को पत्र लिखकर और व्यक्तिगत रूप से मिलकर अपनी पीड़ा बता चुके हैं।
इस्तीफे में गिनाए ये कारण :
मीणा ने इस्तीफे में नाराजगी के कई कारण गिनाए हैं। इनमें हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद हिंसा फैलाने वालों पर कार्रवाई नहीं करना। दवाब में आकर उनसे समझौता करना। आरक्षण विधेयक में क्रीमीलेयर का प्रावधान करके अनुसूचित जाति, जनजाति के अधिकारों पर कुठाराघात करना। भाजपा विधायक दल की बैठक में उन्हें नहीं बुलाना, पाटोली, पीपलखेड़ा, हिंडौन, सिकंदरा में हुई हिंसक घटनाओं के लिए दोषियों पर कार्रवाई नहीं करना। हिंसा फैलाने वालों पर मुकदमे दर्ज करने के बाद उन्हें बुलाकर बात करना और दबाव में समझौता करना। भारी गबन, मंत्रियों का भ्रष्टाचार और सरकारी मनमानी शामिल हैं।
36 का आंकड़ा, 36 पेज का इस्तीफा :
डॉ.मीणा का जयपुर-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग को चौड़ा करने का काम कर रही कंपनी के लोगों से झगड़ा होने के बाद से ही मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के साथ 36 का आंकड़ा हो गया है। वे कई बार दौसा कलेक्टर राजेश यादव और पुलिस अधीक्षक पी.रामजी की शिकायत मुख्यमंत्री से कर चुके थे। अब उन्होंने अपना इस्तीफा भी 36 पेज में ही लिखा है। वे मंत्री पद और भाजपा कार्य समिति से पहले ही इस्तीफा दे चुके थे।
मैंने इस्तीफा दे दिया है :
यह सही है कि मैंने विधानसभा की सदस्यता से अपना इस्तीफा दे दिया है। इस्तीफे के कारणों का आप पता लगाएं। मैंने इस्तीफे में कारण लिख दिए हैं।
-डॉ. किरोड़ीलाल मीणा, पूर्व खाद्य मंत्री