नई दिल्ली.
पेट्रो उत्पादों व कमोडिटी की बढ़ती कीमतों तथा मजबूत मांग के चलते 5 जुलाई को समाप्त सप्ताह में मुद्रास्फीति की दर 11.91 फीसदी दर्ज की गई है। हालांकि, खाद्य पदार्र्थो व खाद्य उत्पादों की कीमतें गिरी हैं, जो जनता के लिए अच्छा संकेत है। आंकड़े जारी होने से कुछ देर पहले वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था अब भी मुद्रास्फीति के दबाव में है। रिजर्व बैंक के मौद्रिक उपायों के चलते धन के प्रवाह पर कुछ लगाम कसी है, लेकिन पूरा असर दिखने में समय लगेगा। सरकार द्वारा और उपाय किए जाने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
मामूली उछाल :
पांच जुलाई को समाप्त सप्ताह में मुद्रास्फीति की दर में क्.क्२ फीसदी की मामूली उछाल दर्ज की गई। यह पिछले सप्ताह यह ११.८९ फीसदी थी, जबकि पिछले वर्ष समान अवधि में यह ४.६१ फीसदी थी।
गवर्नर संग बैठक :
रिजर्व बैंक के गवर्नर वाई वी रेड्डी ने चिदंबरम को बताया कि कीमतों पर दबाव जारी है और मौद्रिक उपायों का असर आने में कुछ समय लगेगा। उन्होंने रेड्डी के विचार सार्वजनिक करते हुए कहा कि वे भी उनसे इत्तफाक रखते हैं।
अंतर बैंकीय ब्याज दरों में उछाल :
चिंदबरम ने कहा कि अंतर बैंकीय ब्याज दरों में वृद्धि से साफ है कि बाजार में तरलता सख्त हुई है। अंतर बैंकीय ब्याज दर ७ फीसदी से उछल कर ९.१ फीसदी हो गई है।
समीक्षा में सख्ती संभव :
रिजर्व बैंक 29 जुलाई को मौद्रिक नीति की समीक्षा करने जा रहा है। इसमें ब्याज दरों व सीआरआर में और सख्ती की जा सकती है।
कीमतों पर दबाव
‘रिजर्व बैंक गवर्नर वाई वी रेड्डी का कहना है कि कीमतों पर दबाव जारी है। मैं भी उनसे इत्तफाक रखता हूं।’
-पी. चिदंबरम, वित्त मंत्री