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छोटे दलों पर खींचतान तेज

नई दिल्ली मनमोहन सिंह सरकार की संसद में 22 जुलाई को होने वाली ‘अग्नि परीक्षा’ से पहले पक्ष और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी ताकत बढ़ाने के तमाम प्रयास कर रहे हैं। इस कांटे के मुकाबले में छोटे दलों की भूमिका निर्णायक होगी। लिहाजा वामदलों ने गुरुवार को तीन सांसदों वाले राष्ट्रीय लोकदल (आरएलडी) के प्रमुख अजीत सिंह को अपने पाले में लाने की कोशिश की। वहीं, यूपीए ने भी अपना दांव खेलते हुए लखनऊ एअरपोर्ट का नाम बदलकर अजीत सिंह के पिता चरण सिंह के नाम करने की घोषणा कर दी।

अजित सिंह ने नहीं खोले पत्ते

भाकपा महासचिव एबी वर्धन ने नई दिल्ली में अजित सिंह के निवास पर जाकर उनसे करार व वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर चर्चा की। मुलाकात के बाद वर्धन ने कहा, ‘मैंने उन्हें वामदलों की स्थिति स्पष्ट की और उन्होंने अपनी। वहीं, अजीत सिंह ने कहा, ‘वर्धन ने हमें कुछ नए तथ्य बताए हैं। हम इन्हें ध्यान में रखते हुए चर्चा करेंगे और अपना फैसला लेंगे।’ लखनऊ एअरपोर्ट का नाम उनके पिता के नाम पर करने के सरकार के फैसले पर सिंह ने कहा कि यह निर्णय देरी से लिया गया है, लेकिन वे इससे खुश हैं।

पप्पू यादव को मंजूरी मिली

दिल्ली हाईकोर्ट ने आरजेडी के विवादास्पद सांसद पप्पू यादव को 22 जुलाई के विश्वास मत में शामिल होने की मंजूरी दे दी है। यादव को माकपा विधायक अजीत सरकार की 14 जून 1998 को हुई हत्या में दोषी पाया गया था।

ये आए सरकार के विरोध में

उत्तरप्रदेश में अमरोहा के निर्दलीय सांसद हरीश नागपाल ने विश्वास मत के दौरान सरकार के खिलाफ वोट डालने की घोषणा कर दी है। उन्होंने केंद्र पर जनविरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे अब भाजपा के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। दूसरी ओर, एक सांसद वाली नेशनल लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष अरशद खान ने कहा उनकी पार्टी अपने सांसद बालेश्वर यादव को व्हिप जारी कर सरकार के खिलाफ वोट डालने को कहेगी।

गरजीं सोनिया

परमाणु कार्यक्रम और विदेशी नीति पर हम समझौता नहीं कर सकते। हमें किसी से देश भक्ति का प्रमाण पत्र लेने की जरूरत नहीं है।

करात का सुझाव

कांग्रेस का जहाज डूब रहा है। अपने यूपीए साथियों को सुझाव है कि वे जितनी जल्दी हो सके इस डूबते जहाज से कूद जाएं।

बिफरे लालू

बसपा ओछी राजनीति कर रही है। यूपीए की मजबूत स्थिति देखकर माया और भगवा पार्टी के हाथ-पैर फूल रहे हैं। 22 जुलाई को जीत धर्मनिरपेक्ष ताकतों की ही होगी।

अजित का संशय

अब परमाणु करार कोई मुद्दा नहीं है। वैसे भी मैं शुरू से परमाणु ऊर्जा का विरोधी रहा हूं। अभी खेल चुनाव को लेकर चल रहा है। मेरे मन में क्या है, मैं जल्दी बताऊंगा।





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