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Chandigarh Chandigarh गुरु पूर्णिमा पर विशेष
18 जुलाई को पूर्णिमा है। इसे व्यास अथवा गुरु पूर्णिमा कहा जाता है। इस दिन अपने आध्यात्मिक गुरु की पूजा आराधना की जाती है। यदि गुरु द्वारा कोई मंत्र की दीक्षा ली हो तो इस दिन उस गुरु का विधि विधान से पूजा अर्चना कर लिए गए मंत्र की कम से कम 5 माला जाप जरूर करना चाहिए।
विधि विधान
पांच मौसमी फल-वस्त्र मिष्ठान, दक्षिणा गुरु के चरणों में अर्पित करना चाहिए। शास्त्रों में उल्लेख है कभी गुरु के यहां खाली हाथ नहीं जाना चाहिए। गुरु को सदैव पीले या भगवा रंग के वस्त्र चढ़ाना चाहिए। मौसमी फल नहीं मिल सके तो श्रीफल जरूर होना चाहिए। गुरु के चरणों को धोकर उस पानी को घर के कोनों और दीवारों पर छींटना चाहिए। तत्पश्चात धूप दीप नैवेद्य का भोग लगाकर उनकी आरती करें। प्रसाद में पीले या केशरियां पेढ़े वितरित करें।
फल प्राप्ति
गुरु के संस्कारों के कारण शादी विवाह उन्नति, यशकीर्ति प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है। गुरु ही अपनी शक्ति से शिष्यों की रक्षा करता है एवं मंजिल पाने के लिए मार्ग प्रशस्त करता है।