नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी ने संसद के विशेष सत्र के करीब आने के साथ ही कांग्रेस और यूपीए सरकार पर हमला और तेज कर दिया है। कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के भाजपा के युवा सांसदों के करार के पक्ष में होने के सवाल पर उलटवार करते हुए भाजपा ने गुरुवार को कहा कि अगर कांग्रेस में हिम्मत हो तो वह 22 जुलाई के विश्वासमत के दौरान गुप्त मतदान करा ले।
नेता प्रतिपक्ष लालकृष्ण आडवाणी के आवास पर एनडीए के मुख्यमंत्रियों की बैठक के बाद भाजपा ने यूपीए सरकार से यह सीधा सवाल भी पूछ डाला कि वह देश को यह बताए कि परमाणु करार हो गया या होना है। भाजपा ने अफसोस जताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री कार्यालय मोलभाव का काउंटर बन गया है। बैठक में यह भी तय किया गया कि विश्वासमत के दौरान विपक्ष का हमला मोटे तौर पर महंगाई व आतंरिक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर केंद्रित होगा। परमाणु करार की बात तो होगी, मगर विपक्ष इसे ज्यादा तवज्जो नहीं देगा।
बैठक का आयोजन विश्वासमत को लेकर विपक्ष की रणनीति मजबूत करने के लिए किया गया था। बैठक की जानकारी देते हुए भाजपा महासचिव अरुण जेटली ने दावा किया कि शिरोमणि अकाली दल सहित एनडीए के सभी घटक दल यूपीए सरकार के खिलाफ वोट देंगे। जेटली ने यह भी दावा किया कि सरकार के खिलाफ कई लोग भाजपा से संपर्क कर रहे हैं। इनमें एनडीए के बाहर के व एनडीए के विरोधी दल भी शामिल हैं। बैठक में कर्नाटक और राजस्थान को छोड़कर एनडीए के सभी मुख्यमंत्री मौजूद थे।
जेटली ने कहा कि मीडिया रिपोर्टे से यह आभास हो रहा है कि यूपीए सरकार रहे या जाए परमाणु करार अस्तित्व में आ ही जाएगा। इसीलिए जरूरी है कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इस बारे में देश को वस्तुस्थिति से अवगत कराएं। सांसदों को रिझाने से प्रधानमंत्री कार्यालय की छवि को ठेस पहुंचने का आरोप लगाते हुए जेटली ने कहा कि अगर चुनाव जल्द हुए तो यह बात साफ हो ही जाएगी।