भोपाल. सड़क हादसे में गलती हुई तो आप पुलिस कार्रवाई के दायरे में आएंगे, साथ ही परिवहन विभाग आपका ड्राइविंग लाइसेंस भी निरस्त कर देगा। प्रदेशभर में बढ़ते सड़क हादसों और उसमें होने वाली मौतों से चिंतित मानव अधिकार आयोग और परिवहन विभाग ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया को दुरुस्त करने के लिए ऐसी व्यवस्थाओं के बारे में सोच रहा है।
आयोग ने परिवहन से कुछ ऐसे सुझाव मांगे हैं, जिन्हें लाइसेंस प्रक्रिया में शुमार किया जाए। इन दिनों परिवहन विभाग ऐसे सुझावों के प्रस्ताव बनाने में व्यस्त है। विशेष और कारगर सुझावों के लिए अगस्त में एक कार्यशाला आयोजित की जाना है।
इस कार्यशाला में यातायात विशेषज्ञ, पुलिस महकमे, एनजीओ एवं परिवहन विभाग के अधिकारियों को आमंत्रित किया जाएगा। क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी दिनेशकुमार जैन बताते हैं कि ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया के लिए आयोग व परिवहन विभाग के बीच बैठक हुई। आयोग ने इस व्यवस्था की खामियों और सुधार के लिए सुझाव मांगे थे, जो उन्हें सौंपे जाने हैं।
लर्निग और परमानेंट ड्राइविंग लाइसेंस बनाने की प्रक्रिया में सुधार के लिए विभाग तैयारियां कर रहा है। इसे परिपक्व बनाने के लिए विशेषज्ञों और इन क्षेत्रों से जुड़ेलोगों से सुझाव मांगने के लिए एक कार्यशाला अगस्त में आयोजित की जा रही है।
—एनके त्रिपाठी, परिवहन आयुक्त
ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया में सुधार की जरूरत है। इसमें पारदर्शिता लाना जरूरी है। इसे सख्त किया जाना चाहिए कि बगैर ड्राइविंग जाने कोई भी लाइसेंस न बनवा सके।
—वीके पवार, एडीजी, पीटीआरआई
परिवहन विभाग के सुझाव
>> ड्राइवर की गलती से सड़क हादसा होने पर एक से तीन साल तक उसका लाइसेंस निरस्त किया जाए
>> वाहन निर्माता कंपनियां स्वयं के ड्राइविंग स्कूल संचालित करें
>>भारी वाहनों के ड्राइवरों को आईटीआई में प्रशिक्षण दिया जाए
>> ड्राइविंग टेस्ट के लिए पर्याप्त मैदान और ट्रैक की व्यवस्था हो
आयोग के सुझाव
>> लाइसेंस प्रक्रिया सख्त हो
>> कैंप लगाकर लाइसेंस बांटने की प्रक्रिया समाप्त हो
>> प्राचार्यो द्वारा लाइसेंस जारी व्यवस्था पर रोक लगे
>> स्थाई लाइसेंस के परीक्षण की वीडियो रिकार्डिग हो