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राज्य सरकार की मंशा साफ नहीं

जयपुर. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कई राज्यों में छात्रसंघ चुनाव होने के बावजूद राजस्थान विश्वविद्यालय के मामले में राज्य सरकार की मंशा साफ नहीं होने से छात्रों का सब्र टूट गया है।

चुनाव की मांग को लेकर पिछले तीन वषरे में कई आंदोलन करने के बाद एनएसयूआई व अन्य संगठन अब इसे राज्यव्यापी मुद्दा बनाकर फिर से सड़कों पर उतर आए हैं। साथ ही भाजपा की छात्र शाखा एबीवीपी भी सरकार के खिलाफ होती दिख रही है। उसके प्रदेश अध्यक्ष राजीव सक्सेना का कहना है कि चुनाव की मांग पर वे एनएसयूआई का समर्थन करते हैं, लेकिन उनका आंदोलन करने का तरीका गलत है।

गौरतलब है कि, एक जनहित याचिका पर हाई कोर्ट ने 5 मई 2005 को छात्रसंघ चुनाव पर रोक लगा दी थी। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट में गया और उसने चुनाव को हरी झंडी दिखा दी, लेकिन इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार को सौंप दी। सरकार को लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के आधार पर चुनाव कराना था लेकिन तीन वर्ष गुजर जाने के बाद भी कुछ नहीं हुआ।

कई राज्यों में हुए चुनाव
एनएसयूआई के पूर्व नेता विजय तिवाड़ी ने बताया कि दिल्ली, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, गुजरात सहित कई राज्यों में हाल ही छात्रसंघ चुनाव हुए हैं। इन राज्यों में भी राजस्थान की तरह ही रोक लग गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियमों के तहत चुनाव कराने के आदेश के बाद चुनाव हो गए।

सिफारिशों में संशोधन हो: विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष राजपाल शर्मा का कहना है कि लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों में संशोधन कराकर चुनाव कराए जाने चाहिए। राज्य सरकार की कोई मंशा नहीं है, इसलिए तीन वर्ष बाद भी यह मसला अटका हुआ है।

सरकार नहीं चाहती: एनएसयूआई के प्रदेश अध्यक्ष धीरज गुर्जर का कहना है कि विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग पर 14 जिलों में आंदोलन शुरू हो चुका है। एकसाथ हजारों छात्रों की मांग को कैसे दबाया जा सकता है। सरकार चुनाव के पक्ष में नहीं लगती, लेकिन छात्र अपनी जायज मांग को मनवाकर रहेंगे। पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष पुष्पेन्द्र भारद्वाज का कहना है कि सोची समझी रणनीति के तहत राज्य सरकार चुनाव नहीं कराना चाहती। उसको खतरा लग रहा है कि अगर छात्र दोबारा राजनीति में सक्रिय हुए तो वे उसके खिलाफ आंदोलन कर सकते हैं।

चुनाव पर एतराज नहीं: महारानी कॉलेज की प्रिंसिपल अमला बत्रा का कहना है कि वे छात्रसंघ चुनाव के पक्ष में हैं, लेकिन अगर कोई पर्दे के पीछे बैठकर छात्रसंघ की राजनीति करे, तो उनको यह मंजूर नहीं। राजस्थान कॉलेज की प्रिंसिपल दमयंती गुप्ता का कहना है कि विश्वविद्यालय के चुनाव में पहले की तरह हिंसा न हो, तो ही चुनाव कराना उचित होगा। सरकार को लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों के आधार पर एक मॉडल तैयार करना होगा, ताकि चुनाव में शांति व्यवस्था बनी रहे।

पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत का समर्थन
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एनएसयूआई की राज्य के सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थाओं में छात्रसंघ चुनावों की मांग का समर्थन किया है। गुरुवार को यहां जारी एक बयान में उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया कि पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने जिस युवा को 18 साल की उम्र पर मताधिकार देकर देश एवं समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी का अधिकार दिया था, राज्य की भाजपा सरकार छात्रसंघों के चुनाव नहीं कराकर उन्हीं नौजवानों को लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित कर रही है।

विश्वविद्यालय और कॉलेज बंद कराए
राजस्थान विश्वविद्यालय के छात्रों ने गुरुवार को छात्रसंघ चुनाव कराए जाने की मांग पर राजस्थान विश्वविद्यालय और संबंधित कॉलेजों को बंद कराया। एनएसयूआई के छात्र नेता योगेश शर्मा, कैलाश वर्मा तथा सुरेंद्र मीणा के नेतृत्व में यह प्रदर्शन हुआ। छात्रों ने विश्वविद्यालय के गेट के बाहर करीब आधा घंटे तक प्रदर्शन करके लोगों का रास्ता भी रोका। इसी तरह स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने राजस्थान विश्वविद्यालय के गेट के बाहर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का पुतला फूंका।

आंदोलन की झलकियां

झंडे लेकर रोड पर लेटे
जेएलएन मार्ग पर मुख्यमंत्री का काफिला शाम गुजरने से पूर्व महावीर उद्यान के पास एनएसयूआई के कार्यकर्ता हाथों में झंडे लेकर रोड पर आ गए और लेट गए। पुलिस ने उनको बलपूर्वक मौके से हटा दिया। दो छात्र दीपक दुरानी व ओमप्रकाश को बजाज नगर पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

लाठी चार्ज का आरोप
प्रदेशाध्यक्ष धीरज गुर्जर ने मुख्यमंत्री के काफिले को रोकने का प्रयास कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा लाठी चार्ज किए जाने का आरोप लगाया है। लाठी चार्ज से गुर्जर, सांवर चौधरी व महेश डाका के चोटे आई। गांधीनगर उप अधीक्षक मुकुंद बिहारी ने बल प्रयोग किए जाने की बात को गलत बताया है, केवल रास्ते से हटाना बताया है।

कोई वार्ता करने नहीं आया
बजाज नगर में टावर पर दो छात्रों के चढ़ने के बात छात्रों से वार्ता करने जिला प्रशासन का कोई अधिकारी नहीं आया। पुलिस के अधिकारी मौके पर आए जो चंद समय वहां खड़े रहकर लौट गए।

लीक होने से बदला स्थल
जयपुर में पहले एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने एमआईरोड जीपीओ के पास टॉवर पर चढ़ने का कार्यक्रम बनाया था। सूचना पुलिस को मिलने पर गुरुवार सुबह वहां पुलिस तैनात करने से स्थान बदल कर बजाजनगर बीएसएनएल के टावर पर एनएसयूआई के देहात जिलाध्यक्ष महेश बाजीयाव प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य रामहंस मीणा चढ़े।





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