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अविरल पर जयपुर को गर्व

जयपुर. avril मुझे एक अच्छा सर्जन बनना है और इसके लिए कड़ी मेहनत को अपना हथियार मानता हूं। यह कहना हैं जयपुर के अविरल गुप्ता का जिसने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की ओर से आयोजित अखिल भारतीय प्री-मेडिकल परीक्षा में देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया हैं। वे सीबीएसई की ओर से आयोजित एआईपीएमटी में भी देश में 8वीं रैंक पर रहे हैं।

अपनी इस सफलता से शहर का नाम रोशन करने वाले अविरल ने सी. सेकंडरी तक की पढ़ाई जयपुर से ही की है। इसके बाद उन्होंने मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए दिल्ली को चुना। वो अपनी सफलता का श्रेय पिता डॉ. प्रवीण गुप्ता और मां आशा गुप्ता को देते हैं। अविरल निर्माण नगर निवासी हैं।

एमबीबीएस में प्रवेश के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) की प्रवेश परीक्षा में जयपुर के छह विद्यर्थियों का चयन हुआ है, जबकि पिछले साल सिर्फ एक विद्यार्थी का चयन हुआ था। सामान्य श्रेणी की फस्र्ट रैंक भी जयपुर के ही अविरल गुप्ता ने हासिल की है। पिछले साल तक एम्स में कुल 53 सीटें थीं। इस बार सीट बढ़ाकर 72 की गई हैं। इनमें सामान्य श्रेणी में 45, ओबीसी में 19, एससी में पांच और एसटी श्रेणी में तीन विद्यार्थियों का चयन किया गया है।

इस साल करीब 50 हजार परीक्षार्थियों ने एम्स की प्रवेश परीक्षा दी थी। इस बार परिणाम रैंक के अनुसार घोषित किया गया है, इसलिए कटऑफ मार्क्‍स का पता नहीं चल पाया। कई विद्यार्थी सूचना के अधिकार कानून के तहत परिणाम की पूरी जानकारी प्राप्त करने की तैयारी कर रहे हैं।

एम्स की प्रवेश परीक्षा में पिछले साल जयपुर से सिर्फ देवांशु बंसल का चयन हुआ था। इस बार छह विद्यार्थियों अविरल गुप्ता (फस्र्ट रैंक), पुनीत गोयल (20वीं रैंक), अभिषेक अग्निहोत्री (32वीं रैंक), पीयूष कुमार शर्मा (37वीं रैंक), रोमन सैनी (ओबीसी 15वीं रैंक), अक्षांश वर्मा (एससी थर्ड रैंक) का चयन हुआ है तो इसका कारण यह है कि उनका लक्ष्य स्पष्ट था और उन्होंने नियमित अध्ययन किया।

उन्होंने परीक्षा से पहले अध्ययन के दौरान नए पाठ में उलझने की बजाय पुराने पाठ को रिवाइज करने की तरफ ज्यादा ध्यान दिया। उनका टाइम मैनेजमेंट अच्छा था। उन्होंने फिजिक्स को थोड़ा ज्यादा और बायोलॉजी को थोड़ा कम वक्त दिया। प्रश्न पत्र हल करने के अभ्यास के साथ ही उन्होंने सैद्धांतिक पढ़ाई को नहीं भुलाया और उसकी भी अच्छी तैयारी की।

इस साल भी एम्स का प्रश्न पत्र हमेशा की तरह कठिन था। आकाश इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर विनय नयासर ने बताया कि सभी प्रश्न 11वीं और 12वीं कक्षा के पाठ्यक्रम में से थे। फिजिक्स के प्रश्न सबसे कठिन थे, लेकिन परीक्षार्थियों को भी इसी विषय में ज्यादा अंकों की उम्मीद थी। इसमें 11वीं की क्लासिकल फिजिक्स में से मैकेनिक्स पर आधारित सवाल ज्यादा थे। केमिस्ट्री में ऑर्गेनिक पर ज्यादा ध्यान दिया गया।

ऑर्गेनिक के बाद फिजिकल केमिस्ट्री के सवाल थे।
इनऑर्गेनिक के सवाल कम थे। बायोलॉजी में इस बार सामान्य प्रश्न ज्यादा थे, जबकि टैक्सोनॉमी के सवाल कम थे, जिसकी विद्यर्थियों को ज्यादा चिंता रहती है।

अगर सपना हो एम्स में जाने का

जयपुर. साइंस-बायो लेने वाले हर छात्र का सपना अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में प्रवेश पाना होता है। इसमें चयन किस तरह से होता है, इसकी परीक्षा में क्या-क्या पूछा जाता है, दूसरे प्री मेडिकल टेस्ट से एम्स किस तरह से अलग है, इसके बारे में कुछ विशेष गौर करने की जरूरत है।

एम्स में 10 से 15 फीसदी सवाल असर्शन रीजनिंग टाइप के आते हैं। बाकी मल्टीपल च्वॉइस के होते हैं, जबकि दूसरी पीएमटी में सिर्फ मल्टीपल चॉइस वाले सवाल ही पूछे जाते हैं। एम्स में लड़कियों के लिए अलग से कोई आरक्षण नहीं होता है, जबकि एसटी, एससी और ओबीसी के लिए 49 प्रतिशत सीटें आरक्षित हैं।

साढ़े तीन घंटे के पेपर में कुल 200 सवाल पूछे जाते हैं। दूसरे पीएमटी के पेपर तीन घंटे के होते हैं। एम्स परीक्षा में सामान्य ज्ञान के सवाल अलग से होते हैं। इनमें 60 सवाल फिजिक्स के, 60 केमिस्ट्री के, 60 बायोलॉजी के और 20 सवाल जनरल नॉलेज के होते हैं। बायोलॉजी में आधे बॉटनी और आधे जूलॉजी के होते हैं। इसमें नेगेटिव मार्किग भी होती है। सही सवाल पर एक नंबर दिया जाता और गलत पर एक-तिहाई काट लिया जाता है।

एम्स परीक्षा : एम्स एमबीबीएस प्रवेश परीक्षा साल में एक बार होती है और ज्यादातर मई में देश के अलग-अलग शहरों में आयोजित की जाती है। इस परीक्षा के लिए छात्र मार्च में फार्म भर सकते हैं तथा 17 साल से अधिक आयु होना जरूरी है। इसकी सूचना स्थानीय और राष्ट्रीय अखबारों में दी जाती है। यह परीक्षा कई बार दी जा सकती है तथा कितने ही प्रयास किए जा सकते हैं।





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