जयपुर.
छात्र, शिक्षा और शिक्षकों के मुद्दे को लेकर राज्य विधानसभा में सत्र के आखिरी दिन जमकर हंगामा हुआ। पिछले सत्र में छात्र संघ चुनाव कराने की घोषणा करके भी कार्यक्रम घोषित नहीं करने को लेकर विपक्ष ने काफी शोर-शराबा किया।
चार विधायक वैल में आकर धरने पर बैठ गए। बाद में पूरी कांग्रेस ही वैल में आ गई। इसी तरह राजस्थान विश्वविद्यालय उप विधियां संशोधन विधेयक को पारित करने के समय कांग्रेस ने मत विभाजन की मांग करके सरकार को संकट में डाल दिया।
सरकार ने सदन में संख्या के आधार पर विधेयक को पारित करने की मांग की, लेकिन इसके बावजूद प्रतिपक्ष मत विभाजन की मांग पर अड़ गया। समय कम होने के कारण विधानसभा अध्यक्ष सुमित्रासिंह के आग्रह करने पर कांग्रेस ने मत विभाजन की मांग छोड़ी। कांग्रेस का आरोप था कि सरकार विश्वविद्यालय जैसी संस्थाओं को तो पंगु बनाने का काम कर ही रही है, राज्यपाल की शक्तियों और अधिकारों को भी कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
छात्र संघ चुनावों का मुद्दा कांग्रेस के संयम लोढ़ा ने पाइंट ऑफ इन्फोरमेशन के तहत शून्यकाल में उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य में कई जगह चुनाव की मांग को लेकर छात्र टंकियों और टावरों पर चढ़े हुए हैं। उनका जीवन संकट में है, इसलिए सरकार चुनाव कार्यक्रम बताए। कांग्रेस श्रीगोपाल बाहेती, हरिमोहन शर्मा, जुबेर खान, बी.डी. कल्ला और लोकजनशक्ति पार्टी के रणवीर गुढ़ा ने भी उनका साथ दिया।
बाद में कांग्रेस विधायक वैल में आकर धरने पर बैठ गए। विधानसभा अध्यक्ष ने विधेयक पारित होने के बाद जवाब दिलवाने की बात कहकर धरना समाप्त कराया।
कुलाधिपति के अधिकारों का हनन करने वाला कानून : राजस्थान विश्वविद्यालय उप विधियां संशोधन विधेयक को कांग्रेस ने कुलाधिपति के अधिकारों का हनन करने वाला और विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को कम करने वाला काला कानून बताया।
संयम लोढ़ा,डॉ. बी.डी. कल्ला, रामनारायण मीणा, जुबेर खान ने इस संशोधन विधेयक को काला कानून बताते हुए वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार स्वायत्त संस्थाओं पर नियंत्रण के लिए विधेयक ला रही है। शिक्षा मंत्री कालीचरण सराफ ने कांग्रेस की आपत्तियों को निराधार बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बनी रहेगी।
रसोई गैस की 65 नई एजेंसियां
राज्य विधानसभा में गुरुवार को रसोई गैस और महंगाई को लेकर जोरदार हंगामा हुआ। पक्ष और प्रतिपक्ष ने एक दूसरे पर जमकर आरोप लगाए और महंगाई के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए नारेबाजी की। शोरगुल और हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष सुमित्रा सिंह को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। हंगामे के बीच खाद्य मंत्री घनश्याम तिवाड़ी ने बताया कि राज्य में 65 नई गैस एजेंसियां खोलने की अनुमति दी गई है। इनमें से 7 जयपुर में खोली जाएगी।
शोरगुल हंगामा
शोरगुल की स्थिति लगभग बीस मिनट तक बनी रही। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अगला प्रश्न पुकार लिए जाने के बाद भी सदस्यों के बोलते रहने और आरोपों का सिलसिला जारी रहने से सदन में कौन क्या कह रहा है सुनाई नहीं पड़ रहा था। इस हंगामे के दौरान घनश्याम तिवाड़ी व कांग्रेस के रामनारायण के बीच नोकझोक हुई। अंतत: अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
सरकारी शिकंजे में विश्वविद्यालय
राजस्थान विश्वविद्यालय अब सरकार के शिकंजे में फंस गया है। सरकार ने विश्वविद्यालय की कुलपति चयन कमेटी में अपने प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ाकर दो कर दी है। राज्यपाल के अधिकारों में कटौती करते हुए अब सरकार की सलाह अनिवार्य कर दी है। वित्तीय अनियमितताएं अथवा किसी भी तरह की गड़बड़ियां करने के आरोप में कुलपति को हटाने का अधिकार भी अपने हाथ में ले लिया है।
राजस्थान विधानसभा ने गुरुवार को विपक्ष के विरोध के बावजूद राजस्थान विश्वविद्यालय की उप विधियों में संशोधन करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी। हालांकि कांग्रेस ने इसे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता नष्ट करने वाला काला कानून बताकर सरकार से न केवल वापस लेने की मांग की, बल्कि पारित होने के समय मत विभाजन की मांग भी रखी।
इसी तरह राजस्थान विश्वविद्यालयों में बरसों से काम कर रहे अस्थायी शिक्षकों को स्थायी करने के लिए लाए गए संशोधन विधेयक पर भी कांग्रेस से सवाल खड़े किए और कहा कि स्क्रीनिंग कमेटी की आड़ में सरकार को अपने-पराए में भेद करने मौका मिल जाएगा। इसमें आरक्षित वर्ग के शिक्षकों को कोई लाभ नहीं मिल पाएगा। बहुमत के आधार पर सरकार ने दोनों विधेयक पारित करा लिए।
गैस पर गर्मा-गर्मी
मुद्दा- रसोई गैस।
क्यों- कर कम नहीं करने पर।
कार्यवाही: सदन स्थगित।
शिक्षा पर सिर्फ शोर
मुद्दा- छात्र संघ चुनाव।
क्यों- चुनाव कार्यक्रम जल्द घोषित करने की मांग।
क्या हुआ- कांग्रेसियों के वैल में आ जाने से कार्यवाही बाधित।
संकट में सरकार
मुद्दा: राजस्थान विश्वविद्यालय अस्थायी शिक्षक आमेलन विधेयक।
क्या: विवि को पंगु बनाने, शिक्षा मंत्री पर हिडन एजेंडा पूरा करने का आरोप।
मत विभाजन की मांग-विधेयक को पारित करने के समय कांग्रेस ने राज्यपाल की शक्तियों को कम करने का आरोप लगाते हुए मत विभाजन की मांग करके सरकार को संकट में डाल दिया।