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जान की कीमत पर कमाई

रायपुर. truck देवपुरी में अपनी जान की हिफाजत के लिए सड़क पर उतरे ग्रामीणों तथा कारोबारियों को प्रशासन और पुलिस ने लड़ने के लिए ट्रांसपोर्टरों के सामने डाल दिया है। विवाह गहराने लगा है और इलाके में भीतर ही भीतर तनाव सुलग रहा है।

देवपुरी पंचायत ने बस्तर-कोरापुट परिवहन संघ को दफ्तर गांव से हटाने की नोटिस दे दी है लेकिन संघ इसे मानने के लिए तैयार नहीं है। पुलिस ने संघ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर रखी है, इसके बावजूद गांव की चराई जमीन पर संघ से जुड़े ट्रक बदस्तूर पार्क किए जा रहे हैं।

ट्रांसपोर्टनगर के उद्घाटन के बाद मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने इच्छा जताई थी कि सारे ट्रक वहीं पार्क होना चाहिए, लेकिन रायपुर जिला प्रशासन और पुलिस को मुख्यमंत्री की इच्छा से कोई विशेष सरोकार नजर नहीं आता। यही वजह है कि पुलिस ने टिकरापारा थाने में हुए एफआईआर पर अब तक कोई कार्रवाई शुरू नहीं की और ट्रकों को सड़क किनारे पार्क होने से भी नहीं रोका।

चराई जमीन पर पार्किग के नाम पर कब्जे हटाने से प्रशासनिक अफसरों को भी कोई सरोकार नहीं है। दैनिक भास्कर ने गुरुवार को पूरे इलाके की पड़ताल में कई चौंकाने वाली बातें पकड़ीं। गांव वालों और कुछ ट्रांसपोर्टरों से चर्चा के बाद इस बात का खुलासा हुआ है कि मोटी कमाई के कारण ही संघ अपना कार्यालय यहां से हटाने को तैयार नहीं है।

जानकारों ने बताया कि तीन साल से संघ अस्तित्व में आया है। उसके बाद से बस्तर रायपुर रोड पर एक भी गाड़ी संघ की मर्जी के बिना नहीं चल सकती। रायपुर से जाने वाले तमाम ट्रकों को संघ की पर्ची कटवाकर 100 रुपए शुल्क देना पड़ता है। पर्ची काटने के साथ ही संघ के पदाधिकारी गाड़ी को माल लादने के लिए नंबर देते हैं।

रायपुर के ट्रांसपोर्टरों का क्यू सिस्टम अलग है। बस्तर के ट्रांसपोर्टरों की नंबरिंग की व्यवस्था अलग है। ट्रांसपोर्टरों ने बताया कि रायपुर से रोजाना लगभग 150 ट्रक माल लेकर बस्तर जाते हैं। इस लिहाज से रोज करीब 15000 रुपए संघ के फंड में जमा होते हैं। जानकारों का कहना है कि मोटी कमाई के कारण ही ट्रांसपोर्टर गांव वालों से टकराने पर आमादा हैं।

संघ में पर्ची कटवाने का सिस्टम इतना कड़ा है कि अगर कोई ड्राइवर चकमा देकर निकल भी जाए तो उसे अभनपुर तक पीछा करके पकड़ा जाता है। सूत्रों के मुताबिक अगर संघ का दफ्तर भनपुरी स्थित ट्रांसपोर्टनगर में शिफ्ट किया गया तो संघ का वर्चस्व टूटने का अंदेशा है।

गांव में बगावत
देवपुरी तथा आसपास के ग्रामीणों ने संघ कार्यालय को हटाने के लिए सड़क पर उतरने की तैयारी कर ली है। गांव के सरपंच मेहत्तर लाल साहू ने बताया कि चारागाह जमीन पर हाई स्कूल और बच्चों के लिए खेल का मैदान बनाने की प्लानिंग है। सरपंच ने कहा कि संघ कार्यालय से गांव की शांति भी भंग हो रही है। ढाबा वगैरह खुलने से लोग सड़क पर शराब पी रहे हैं और महिलाओं की सुरक्षा को खतरा हो गया है।

मेंटेनेंस में खर्च : ढिल्लन
कोरापुट संघ के अध्यक्ष जसबीर ढिल्लन का कहना है कि दफ्तर के संचालन के लिए 10 लोगों का स्टाफ काम करता है। दफ्तर के लिए चार दुकानें किराये पर ली गई हैं। मोबाइल वगैरह में भी खर्च आता है। इसका मेंटेनेंस पर्ची फंड से ही किया जाता है। अध्यक्ष ने दावा किया कि नंबरिंग सिस्टम होने से ट्रांसपोर्टरों में होड़ नहीं मचती। एक के बाद एक करके प्रत्येक ट्रांसपोर्टर को माल लादने का मौका मिलता है।

राजनैतिक मोर्चा भी
देवपुरी मार्ग पर ट्रकों की आवाजाही रोकने के लिए राजनैतिक और सामाजिक संगठन भी सामने आ गए। शहर कांग्रेस कोषाध्यक्ष सुशील सचदेवा, गोदड़ीवाला धाम के सेवादारी अमर गिदवानी के साथ देवपुरी और आसपास के कारोबारियों के समूह ने भी ग्रामीणों का साथ देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि जब तक देवपुरी और आसपास ट्रकों की बेलगाम आवाजाही नहीं रोकी जाती, सड़कें यूं ही खून से रंगी जाती रहेंगी।

गांववालों और ट्रांसपोर्टरों में समझौते के प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसा रास्ता निकाला जाएगा कि गांव के लोगों को दिक्कत न हो। उनकी समस्या दूर हो जाए। एक-दो दिनों में ठोस पहल शुरु की जाएगी।
— सोनमणी बोरा,कलेक्टर, रायपुर





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