HomeNewsMetrosIndore Indore

दाल-रोटी जुटाना भी बड़ी मशक्कत

इंदौर. बढ़ती महंगाई रोकना अब सरकार के हाथ में नहीं रहा। आम आदमी के लिए दाल-रोटी जुटाना ही बड़ी मशक्कत हो चला है। अप्रैल में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने वाली महंगाई 5 जुलाई को समाप्त हुए सप्ताह में 11.91 फीसदी तक पहुंच गई। यही 19 अप्रैल को 7.75 और साल की शुरुआत में 3.50 फीसदी थी। रोटी, तेल, स्टील के बाद दालें 4-5 रुपए और शकर 2 रु. प्रति किलो तक महंगी हो गई है। हालांकि सरकार का दावा है कि खाद्य पदार्थो व खाद्य उत्पादों की कीमतें गिरी हैं लेकिन आंकड़े इसे झुठला रहे हैं।

नई दलहन की आवक
में देरी- अगस्त अंत तक नई मूंग व उड़द की आवक शुरू हो जाती है और तुवर अक्टूबर में आती है। बारिश की कमी से दलहन की फसल कमजोर होने की चर्चाओं पर भी स्टॉकिस्ट और सटोरियों ने खेल दिखाना शुरू कर दिया है।

विदेशी दालें भी महंगी- प्रदेश दाल मिल एसो. के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल बताते है विदेशों में तुवर, उड़द, मूंग के दाम भारतीय बाजारों से 2-4 रु. किलो ज्यादा हैं इसलिए आयात में भी भारी कमी आई है जबकि खपत बढ़ रही है।

मांग और आपूर्ति में बड़ा अंतर
2007-08 में देश में दलहन उत्पादन 151.10 लाख टन हुआ जबकि 2005-06 में 133.90 लाख टन ही था। फिर भी प्रमुख दालों के दाम नई ऊंचाई पर पहुंच गए। इसका प्रमुख कारण देश में दलहन की मांग 175 लाख टन के आसपास होना है। इसी कारण साल की शुरुआत में जो महंगाई दर 3.50 थी अब 11.94 फीसदी पर पहुंच गई है।

तस्करी सख्ती से रोकें- खेरची व्यापारी राजू खंडेलवाल बताते हैं दालों के बढ़ते दामों को ध्यान में रख सरकार ने निर्यात पर प्रतिबंध लगा रखा है। फिर भी बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल आदि देशों को दालों का निर्यात हो रहा है। जब तक तस्करी सख्ती से नहीं रोकी जाती तब तक कीमतें ज्यादा गिरने की उम्मीद नहीं है।

चावल उत्पादन अच्छा लेकिन मंदी के आसार कम
चावल के थोक व्यापारी दयाल गंगवानी बताते हैं चार महीने में चावल की कीमतों में विशेष परिवर्तन नहीं आया है। किसानों को अच्छे मूल्य मिलने के कारण इस बार उत्पादन अच्छा होगा। यूपी तरफ नया धान आने लगा है और वहां कीमतें भी गिरने लगी हैं लेकिन प्रदेश में नए चावल की आवक में देर है। बाजारों में स्टॉक कुछ कम होने से कीमतें जल्दी गिरने की संभावना भी नहीं।

कैसे घटें तेलों के दाम
तेल व्यवसायी राजेंद्र दम्माणी के मुताबिक क्रूड ऑइल के दाम बढ़ने से खाद्य तेलों की कीमतें नहीं घट रही हैं। हालांकि चार महीने से सोयाबीन, मूंगफली तेल व सरसों तेल के दाम उच्चस्तर पर टिके हुए हैं। सोयाबीन के दाम भी 2750 रुपए क्विंटल के रिकॉर्ड स्तर 2750 को छू गए। बाजार पूरी तरह विदेशों पर निर्भर है। इसके चलते 48-50 रुपए प्रति किलो बिकने वाला सोया तेल 74 रुपए तक पहुंच गया। वह पुराने भाव पर आना मुश्किल है।

फिर भी बढ़ा वायदा कारोबार
आठ वस्तुओं के वायदा कारोबार पर रोक लगाने के बाद वायदा बाजार आयोग व एक्सचेंज वालों ने आसमान सिर पर उठा लिया था। अब आयोग की रिपोर्ट ही बताती है जून में खत्म तिमाही में वायदा कारोबार 25 प्रतिशत बढ़कर 11153.26 अरब रुपए से ऊपर पहुंच गया।

कीमतों पर दबाव
त्नरिजर्व बैंक गवर्नर वाई वी रेड्डी का कहना है कि कीमतों पर दबाव जारी है। मैं भी उनसे इत्तफाक रखता हूं।
-पी. चिदंबरम, वित्त मंत्री





अपने विचार यहां लिखें
नाम:
ईमेल आईडी:
भाषा चुनॆ
हिन्दी रॊमन‌ हिन्दी फॊनॆटिक English
विचार:
कोड: