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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़. विदेशों में रहे रहे लोगों से शादी रचा कर धोखे की शिकार हुई युवतियों को शुरुआती मदद के तौर पर प्रति केस एक हजार अमेरिकी डॉलर दिए जाएंगे। विदेश मंत्रालय ने दूसरे देशों में रह रहे लोगों के अपनी पत्नियों को छोड़ देने के मुद्दे पर विस्तार से विचार-विमर्श के बाद ऐसी महिलाओं के कल्याण के लिए यह योजना तैयार की है।
धोखा देने वालों में भारतीय मूल के भी
धोखा देने वाले पतियों में भारतीय मूल के विदेशी नागरिक भी शामिल होंगे। सहायता भारतीय महिलाओं के संगठनों, भारतीय भाईचारे की एसोसिएशनों और गैर सरकारी संगठनों की तरफ से उपलब्ध करवाई जाएगी। यह संगठन भारतीय मिशन की सूची में दर्ज होने चाहिए।
कौन-कौन होंगे शामिल : विवाह के पांच साल के बीच भारत या विदेश में छोड़ दी गई भारतीय महिलाएं और वे महिलाएं, जिनके विदेश में रह रहे भारतीय पतियों ने शादी के पांच साल बाद तलाक की कार्रवाई शुरु कर दी है, इस स्कीम में शामिल की जाएंगी।
यदि गुजारे भत्ते के लिए केस जरूरी हो तो भी मिलेगी आर्थिक सहायता : अदालतों में चल रहे ऐसे मामलों के लिए भी कानूनी सहायता मुहैया करवाई जाएगी, जिनमें विदेशी भारतीय पतियों ने शादी के दस साल के भीतर एकतरफा तलाक ले लिया हो, विवाह रद्द हो गया हो और जिनमें गुजारे भत्ते के लिए केस की जरूरत हो। ऐसे मामलों में विवाह भारत में होना जरूरी है।
आवेदन में देनी होगी विवाह और सालाना आय संबंधी पूरी जानकारी: पीड़ित महिलाओं को योजना का लाभ लेने के लिए अपने आवेदन पत्र में विवाह की तिथि, स्थान, भारत में विवाह दर्ज करवाने की तारीख, शादी का प्रमाण पत्र, विदेश में रहने वाले पतियों के छोड़ने की तारीख, पासपोर्ट नंबर, इसे जारी करने वाले दफ्तर और एकतरफा तलाक देने की तारीख दर्ज करनी होगी। आवेदन में सालाना आय, किसी अन्य क्षेत्र या एनजीओ से आर्थिक मदद मिलने का जिक्र करना होगा। इसके साथ ही पति की नागरिकता के बारे में भी सूचना देनी होगी।
जांच के बाद पीड़ितों की मदद को सिफारिश
मदद को आए आवेदनों पर केस लड़ने का अधिकार देने के बारे में मिशन जांच कर इसकी मंजूरी देगा। मदद पाने की इच्छुक महिलाओं के आवेदनों को विदेश मंत्रालय की कमेटी जांचेगी। पड़ताल के बाद मंत्रालय की मंजूरी के आधार पर परेशानी में फंसी महिलाओं को मदद देने की मिशन से सिफारिश की जाएगी।