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किडनी कांड में फंस सकते हैं कई डॉक्टर

अमृतसर. किडनी की खरीद-फरोख्त के गैरकानूनी धंधे से जुड़े पंजाब के कई डॉक्टर दिल्ली मेरठ और रांची में ह्मूमन आर्गन ट्रांसप्लांट ऑपरेशन करके करोड़ों रुपए कमा रहे हैं। यह खुलासा अमृतसर पुलिस द्वारा दिल्ली में गिरफ्तार करके लाए गए किडनी दलाल राजन पुरी ने पूछताछ के दौरान हुआ।

16 मार्च 2007 को थाना रामबाग में किडनी की काला बाजारी से संबंधित केस दर्ज कि ए जाने के बाद राजन फरार हो गया था। पुलिस ने उसे दिल्ली के पहाड़गंज से 12 जुलाई को गिरफ्तार किया और इन दिनों वह पुलिस रिमांड पर है।

वह 2003 में देश-विदेश में चर्चा का विषय बने रहे अमृतसर के मशहूर किडनी स्कैंडल में भी शामिल था। दिल्ली भागने से पहले राजन अमृतसर के ब्ल्यू मून और वोल्गा होटल में भी ठहरा रहा। जहां कई डॉक्टर उससे गुप्त तौर पर आकर मिलते रहे।

राजन शुरू-शुरू में किडनी आपरेशन से संबंधित दानकर्ता और मरीजों के झूठे शपथ पत्र तैयार किया करता था, बाद में वह स्वयं दलाल बन गया। उसने किडनी के कुख्यात दलाल विक्की भाटिया को अपना बेटा बना रखा है, जो 2003 के किडनी कांड केस में जमानत पर छूटने के बाद भगौड़ा हो गया। पुलिस द्वारा पहले से ही गिरफ्तार करके जेल भेजा गया, सुरिंदर सिंह राजन पुरी का सहायक था। वह किडनी बेचने वाले लोगों की देखभाल किया करता था।

सुरिंदर सिंह कई किडनी डोनरों को रांची के प्रसाद अस्पताल में लेकर गया, जहां आपरेशन से उनकी किडनियां निकाल कर मरीजों के शरीर में प्रत्यारपित की गई। 1998 में सुरिंदर सिंह ने अपनी किडनी की सौदा किया। जालंधर के न्यू रूबी अस्पताल में सुरिंदर सिंह की किडनी रेशम सिंह नामक मरीज को लगा गई। सुरिंदर सिंह के साथ मार्च 2007 को गिरफ्तार किए गए तरसेम सिंह ने अपनी किडनी लाल चौक, श्रीनगर के रहने वाले मजीद को लगाई।

किडनी ट्रांसप्लांटेशन का यह आपरेशन मोहाली के सिल्वर ऑक अस्पताल में किया गया। एसएसपी कुंवर विजय प्रताप सिंह ने राजन की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि कई बड़े डॉक्टर कानून के शिकंजे में आ सकते हैं।





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