उज्जैन.
प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी माने जाने वाले तथा एज्युकेशन हब के सपने संजोए बैठे उज्जैन में एक ही सप्ताह में दूसरी बार गुरु की गरिमा तार-तार हो गई। शुक्रवार को जब दुनियाभर में गुरु के चरण पखारे जा रहे थे तब आयुर्वेद कॉलेज के गुरुओं को ताले में कैद कर दिया गया। ये गुरु तीन घंटे तक कैद होकर बाहर खड़े शिष्यों का प्रदर्शन देखते रहे।
चिमनगंज क्षेत्र स्थित आयुर्वेद अस्पताल में सुबह 8 बजे शासकीय धन्वंतरि आयुर्वेद कॉलेज के विद्यार्थी अस्पताल बंद कराने पहुंच गए। इन्होंने आते ही अस्पताल के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया और शासन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। शोर की आवाज सुनकर जब अस्पताल में बैठे आरएमओ आर.डी. तिवारी एवं अन्य चिकित्सक अस्पताल के मुख्य द्वार तक आए तो देखा कि वे ताले में कैद हो चुके हैं।
इनके साथ मरीजों तथा उनके रिश्तेदारों को भी कैद किया गया। छात्रों ने पूरे 3 घंटे तक शिक्षकों सहित मरीजों तथा उनके रिश्तेदारों को न तो अस्पताल से बाहर आने दिया और न ही किसी को अंदर जाने दिया।
पुलिस व प्रशासन भी सुस्त
अस्पताल के मुख्य द्वार का ताला खुलवाने को लेकर पुलिस तथा प्रशासन ने भी सुस्ती दिखाई। सिटी मजिस्ट्रेट संघमित्रा गौतम और पुलिस अधिकारी मौके पर तीन घंटे बाद पहुंचे और 11.15 बजे ताला खुला। हालांकि विद्यार्थियों के समझाने पर उन्होंने शुक्रवार को अपना धरना स्थगित कर दिया।
आज फिर करेंगे अस्पताल बंद
अपनी पांच सूत्री मांगों को लेकर आयुर्वेद के विद्यार्थी शनिवार को भी आयुर्वेद कॉलेज एवं अस्पताल बंद करेंगे। प्रदर्शनकारी डॉ. चंद्रभान सिंह ने बताया कि पिछले 15 दिनों से भोपाल में प्रदर्शन के बावजूद मांगों पर अब तक कार्रवाई नहीं होने से यह कदम उठाने पर मजबूर हुए है।
और गुरु ने कर दिया सहजता से माफ
गुरु पूर्णिमा पर शिष्यों से गुरु दक्षिणा की जगह तीन घंटे की कैद भोगने पर मजबूर हुए डॉ. आर.डी. तिवारी ने प्रदर्शन करने वाले शिष्यों को सहजता से माफ कर दिया। उन्होंने कहा वे सब मेरे ही विद्यार्थी है, जो शासन से नाराज हैं और इस माध्यम से अपनी बात शासन तक पहुंचाना चाहते थे। जितने समय मुख्य द्वार पर ताला लगा रहा उस दौरान भी शिष्यों के कारण कोई परेशानी नहीं हुई।
बोले विद्यार्थी -
मुख्य उद्देश्य अस्पताल बंद करने का था, गुरु का अपमान करने का नहीं। प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों ने अस्पताल का ओपीडी बंद करने का प्रयास किया। इस दौरान गुरु की गरिमा को प्रभावित करने हम नहीं चाहते थे।
- रोमेश शर्मा, सचिव आयुर्वेद विकास संगठन
मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद चिकित्सा शिक्षा मंत्री मांगों पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। हम प्रदर्शन के माध्यम से शिक्षा मंत्री तक आवाज पहुंचाना चाहते हैं। गुरु का अपमान करना हमारा उद्देश्य नहीं था।