News
Chhattisgarh
Bilaspur Bilaspur बिलासपुर. साल भर से चल रही प्रक्रिया के बाद आखिरकार सीएम ने चिल्हाटी की जमीन के लिए पांच कंपनियों के नाम पर मुहर लगा दी। यहां 6 हजार 783 एकड़ जमीन इन कंपनियों को दी जाएगी। इनमें से दो कंपनियों द्वारा सीमेंट फैक्ट्रियां लगाई जाएंगी, शेष चूना पत्थर का उत्खनन कर अपनी फैक्ट्रियों को भेजेंगी।
मस्तूरी-मल्हार मार्ग पर स्थित चिल्हाटी व उसके आसपास के गांवों में चूना पत्थर खदान लीज पर लेने के लिए देश भर की 99 नामी सीमेंट कंपनियों ने आवेदन किया था। इन से कई कंपनियों ने शासन से यहां पर सीमेंट उद्योग लगाने की अनुमति देने की मांगी थी। राज्य शासन ने इसके पहले तीन सीमेंट कंपनियों को यहां पर उद्योग लगाने की शर्त पर ही लीज पर खदान देना तय किया था।
इसके मद्देनजर आवेदन करने वाली सभी कंपनियों ने चिल्हाटी में सीमेंट कारखाना लगाने की इच्छा जाहिर की। खनिज विभाग ने आवेदनों की स्क्रूटनी कर सही पाए गए आवेदनों को मंजूरी के लिए राज्य शासन को भेजा था। खदानों की उपलब्धता और कंपनी की वित्तीय स्थिति के आधार पर लीज के लिए कंपनियों के नाम पर शासन ने सैद्धांतिक सहमति दे दी है। 99 कंपनियों में से लाफार्ज, एसीसी, जिंदल स्ट्रीप्स, एसकेएस इस्पात एंड पावर लिमिटेड कोलकाता और प्रकाश इंडस्ट्रीज का नाम फाइनल किया गया है।
चिल्हाटी की जमीन के लिए फाइलें मुख्यमंत्री के पास लंबित थीं। लीजी कंपनियों के नाम पता चलते ही उद्योग जगत में हलचल मच गई है। फिलहाल यह पता नहीं चला है कि किस कंपनी को कितनी जमीन मिली है। इसके लिए खनिज महकमे को शासन के आदेश का इंतजार है। सूत्रों का कहना है कि एक कंपनी अभी भी जमीन के लिए दबाव बनाए हुए है। लाफार्ज कंपनी का अकलतरा के पास आरसमेटा में अपना संयंत्र है, वहीं एसीसी व एसकेएस इंडस्ट्रीज द्वारा चिल्हाटी में सीमेंट संयंत्र लगाया जा सकता है। इसी तरह जिंदल स्ट्रीप्स द्वारा रायगढ़ में संयंत्र लगाने की योजना है।
अधिग्रहित होगी 17 गांवों की जमीन
चिल्हाटी व आसपास 6783 एकड़ में से आधे से अधिक जमीन शासकीय है, शेष रकबा 17 विभिन्न गांवों का है। शासकीय जमीन के लिए कंपनियों को परशानी नहीं होगी, लेकिन गांवों की जमीन अधिग्रहित करने के लिए पसीना बहाना पड़ सकता है। कुछ गांवों के ग्रामीणों ने लीज के विरोध में मोर्चा भी खोल रखा है। विभाग द्वारा भेजे गए प्रस्ताव में से कुछ जमीन की कटौती भी की गई है।
एग्रीमेंट के बाद शुरू होगी प्रक्रिया
सहायक खनिज अधिकारी डी. डोनगांवकर ने बताया कि शासन का आदेश मिलने के बाद अगली प्रक्रिया कंपनियों के एग्रीमेंट का होगा। इसके पश्चात अधिसूचना प्रकाशित कर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। जनसुनवाई में ग्रामीणों के दावा-आपत्तियों की सुनवाई की जाएगी।
कतार में थीं ये कंपनियां
चिल्हाटी में लीज के लिए जिन कंपनियों ने आवेदन दिया था, उनमें मोनेट इस्पात, निको इंडस्ट्रीज नागपुर, द इंडिया सीमेंट चेन्नई, जूम डवलपर्स दिल्ली, रूंगटा माइंस झारखंड, प्रतिमा सिनटेक्स पीथमपुर, आधुनिक कापरेरशन लिमिटेड कोलकाता, बरकबेली सीमेंट नई दिल्ली, सीमेंट मैन्यूफेक्चरिंग कंपनी दिल्ली, जीईएम कमोडिटीज प्राइवेट लिमिटेड दिल्ली, श्याम सेंचुरी इंफ्रास्ट्रक्चर कोलकाता, जेके लक्ष्मी सीमेंट राजस्थान, सेंचुरी टेक्सटाइल्स मुंबई, एसआर पावर लिमिटेड मुंबई, जय बालाजी इंडस्ट्रीज कोलकाता, हीरा सीमेंट रायपुर, नेशनल सीमेंट बिलासपुर, जेके सैम सेंट्रल लिमिटेड कानपुर और जेएलडी सीमेंट लिमिटेड यवतमाल शामिल हैं।
एक नंबर चूना पत्थर
चिल्हाटी क्षेत्र में मिलने वाले सीमेंट ग्रेड लाइम स्टोन की क्वालिटी बेहतर होने के कारण सीमेंट कंपनियां यहां खदान लेना चाह रही थीं। इसके पहले यहां पर स्टील अथारिटी आफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने लीज पर खदान ली थी। बाद में लाफार्ज, एसीसी और जिंदल कंपनी ने लीज पर खदान और सीमेंट संयंत्र के लिए आवेदन किया था। तीनों को लीज आबंटित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई थी। इसी बीच सेल द्वारा आपत्ति के बाद यहां पर दी गई सभी पुरानी लीज रद्द कर नए सिरे आवेदन मंगवाकर लीज देने का निर्णय लिया गया।