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कैदियों पर अब कैमरे की नजर

रायपुर. jail जेल में आने वाले प्रत्येक बंदियों की अब तस्वीर खींची जाएगी। फोटो खींचने के बाद ही बंदियों को बैरकों में भेजा जाएगा। कैमरे से बंदी की तीन अलग-अलग एंग्ल से पासपोर्ट साइज फोटो निकाली जाएगी। उन तमाम तस्वीरों को कंप्यूटर में बंदी की हिस्ट्री के साथ सुरक्षित रखा जाएगा। यह सिस्टम अस्तित्व में आने के बाद बंदी की रिहाई के फोटो से मिलान किया जाएगा।

जानकारों ने बताया कि एक बार फोटो खिंच जाने के बाद उसकी बंदी की हिस्ट्री हमेशा के लिए सुरक्षित कर दी जाएगी। कैदखाने से निकलने के बाद अगर बंदी ने कहीं वारदात की तो उसका रिकार्ड पुलिस को सौंपा जाएगा। जेल में खींचा गया बंदी का फोटो उसे दोबारा सींखचों में पहुंचाने में मददगार साबित होगा। बंदियों का एक फोटो जेल के दाखिल रजिस्टर में चस्पा किया जाएगा। एक फोटो जेलर के रजिस्टर में रखा जाएगा।

एक फोटो कंप्यूटर में सुरक्षित रहेगा। अफसरों ने बताया कि कंप्यूटर में के रिकार्ड में फोटो के साथ बंदी का पूरा बायोडाटा दर्ज किया जाएगा। आला अफसरों ने बताया कि आदतन आने वाले बंदी की फोटो हर बार ली जाएगी। नई फोटो की इंट्री होने पर पुरानी फोटो रिकार्ड से हटा दी जाएगी। पहले चरण में केवल कैदखाने में दाखिल होने वाले नए बंदियों के फोटो खींचे जाएंगे। उसके बाद जेलों में कैद पुराने विचाराधीन और सजायाफ्ता बंदियों की फोटो खींची जाएगी।

विचाराधीन और सजायाफ्ता दोनों की हिस्ट्री अलग-अलग तैयार होगी। आदतन और नामी बदमाशों का रिकार्ड सामान्य बंदियों से अलग रखा जाएगा। अफसरों ने बताया कि तस्वीर खींचने का सिस्टम फिलहाल देश में केवल महाराष्ट्र में है। कुछ अर्सा पहले जेल विभाग के मंत्री रामविचार नेताम ने महाराष्ट्र की कुछ जेलों का निरीक्षण किया था। उसी समय यह व्यवस्था देखकर उन्होंने राज्य में लागू करने की ठानी थी।

25 लाख खर्च
जेल विभाग ने कैमरे के लिए राज्य भर की जेलों पर 25 लाख खर्च किए हैं। राजधानी सहित राज्य की पांचों सेंट्रल जेलों में डिजीटल कैमरे दे दिए हैं। जिला और उप जेलों में भी यही व्यवस्था की गई है। जेल मुख्यालय से सभी 25 जिला व उपजेल को कैमरे भेजे जा चुके हैं। मुख्यालय में जेल के अफसरों और प्रहरियों को फोटो खींचने का ्रप्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसी महीने से बंदियों के फोटो खींचने का नियम अनिवार्य कर दिया जाएगा। अफसरों ने बताया कि अत्याधुनिक तकनीक वाले डिजीटल कैमरे खरीदे गए हैं। कैमरे की चिप को कंप्यूटर में अटैच करके खींचे गए फोटो उसमें सुरक्षित किया जा सकेगा।

कई बार महसूस हुई जरुरत
जेल के बंदियों की फोटो की जरुरत कई बार महसूस की गई थी। करीब साल भर पहले इंदौर बैंक डकैती का सरगना नसीबुद्दीन पेशी के दौरान भाग गया था। उसकी गिरफ्तारी के लिए फोटो की जरुरत महसूस हुई थी। न तो पुलिस ने उसका फोटो खींचा था और न ही जेल में तस्वीर खींची गई थी। उसी समय इस बात का अहसास किया गया था। इसी तरह कई बंदी जेल से छूटने के बाद वारदात करते हैं। उनकी हिस्ट्री तो मिल जाती है, पर फोटो नहीं रहता। इस वजह से आरोपियों को पकड़ने में दिक्कत आती है। अब यह दिक्कत नहीं होगी।





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