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अब वोकेशनल कोर्स पर रहेगा फोकस

भोपाल. सीबीएसई में नए वोकेशनल कोर्स तैयार किए गए हैं। इसमें हेल्थ केयर साइंस शामिल है जो उद्योगों के सहयोग से शुरू किया जाएगा। जो भी स्टूडेंट ये कोर्स करेगा उसे सीबीएसई और उद्योग इकाई दोनों की ओर से सर्टिफिकेट दिया जाएगा।

इसी तरह नेसको के साथ आईटी व फैशन डिजाइनिंग, टूरिज्म आदि के कोर्स भी शुरू करने की योजना है। यह जानकारी अशोक गांगुली अध्यक्ष केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल दिल्ली ने सीबीएसई द्वारा कैंपियन स्कूल में आयोजित दो दिवसीय अधिष्ठापन कार्यक्रम के शुभारंभ समारोह के दौरान कही।

श्री गांगुली ने बताया कि स्कूलों से ही स्टूडेंट्स का जॉब के लिए सिलेक्शन हो इसके प्रयास भी किए जाएंगे। साथ ही भोपाल में नवंबर में प्रस्तावित सहोदय नेशनल कॉन्फरेंस में शिक्षार्थी को 21वीं सदी के लिए तैयार करने की प्रक्रिया पर चर्चा होगी। श्री गांगुली ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण बनाना है।

गणित पढ़ाने के तरीके पर चर्चा
कार्यक्रम में मध्यप्रदेश साथ ही छत्तीसगढ़, गुजरात और राजस्थान के लगभग 150 प्राचार्य शामिल हुए। कार्यक्रम में गणित प्रयोगशाला और इसके पढ़ाने के तरीके में बदलाव को लेकर शिक्षा अधिकारी आर.पी. शर्मा ने जानकारी प्रदान की। भाषा में बदलाव संबंधी जानकारी शिक्षा अधिकारी उमा शिवरमन ने प्राचार्यो को दी।

प्राचार्ये को भी प्रशिक्षण जरूरी
उन्होंने बताया कि सीबीएसई स्कूलों में हर साल नए टीचर्स जुड़ते हैं। नए प्राचार्ये को भी गुणवत्तायुक्त प्रशिक्षण की जरूरत होती है, जो उन्हें दिया जाना जरूरी है। इसलिए भी इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि नई- नई चीजें आ रही हैं, जिन्हें देखते हुए ट्रेनिंग जरूरी है। हर स्कूल का प्राचार्य बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। प्रशिक्षण से स्कूलों की 50 से 55 फीसदी परेशानी हल हो जाती है।

बनाई जाएगी कमेटी
उन्होंने बताया कि गणित और विज्ञान को कैसे स्थान मिले इसके लिए शुरुआत से ही ध्यान रखने की जरूरत है। इसके लिए भी एक कमेटी बनाई जाएगी। साथ ही सर्वे किया जाएगा कि विभिन्न स्कूलों के बीच में क्या गैप है। पहले यह पता लगाया जाएगा कि गणित और फिर विज्ञान में कितना गैप है। उसके बाद भाषा में सर्वे किया जाएगा।

प्राचार्ये को आईआईएम में ट्रेनिंग
उन्होंने बताया कि प्राचार्यो को देश के विभिन्न आईआईएम में ट्रेनिंग के लिए भेजा जाता है। प्राचार्यों को नए विषयों, जीवनकौशल शिक्षा, अवधारणा, गणित की प्रयोगशाला के लिए प्रशिक्षित करना ही मुख्य उद्देश्य है। प्राचार्ये को सहोदय के माध्यम से ट्रेनिंग दी जाती है। देश में 200 से अधिक सहोदय विद्यालय हैं।





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