जयपुर. मास्टरप्लान में जमीन के अन्य उपयोग से वाणिज्यिक उपयोग कराते समय अब संबंधित व्यक्ति को बताना होगा कि भूमि पर किस प्रकार का निर्माण कराया जाएगा। इसके साथ ही लैंडयूज के बाद एक साल में निर्माण नहीं कराने पर आवेदन के साथ जमा कराई राशि जब्त कर लैंडयूज निरस्त कर दिया जाएगा। शुक्रवार को जेडीए में हुई स्टेट लेवल कमेटी की बैठक में ये निर्णय किए गए।
नगरीय विकास विभाग के प्रमुख शासन सचिव डी.बी.गुप्ता की अध्यक्षता में हुई बैठक में रिसर्जेट राजस्थान से संबंधित प्रकरणों समेत कुल 36 मामले रखे गए थे। इनमें से आधे प्रकरणों को मंजूरी दे दी गई, जबकि शेष को डेफर कर दिया गया।
बैठक में आगरा रोड पर जैनपेक्ट, इक्फाई, नारायण हृदयालय, गोनेर रोड पर रीको समेत बड़ी संस्थाओं को आबंटित जमीनों का लैंडयूज बदलने की अनुमति दी गई।
बैठक में तय किया गया कि एक ही आवेदक की ओर से कराए जाने वाले भूउपयोग परिवर्तन से जुड़ी जमीन अलग-अलग टुकड़ों में न होकर एक ही जंक में होनी चाहिए तथा उस जमीन के लिए सीधी एप्रोच जरूरी है।
अब लैंडयूज करते समय आवेदक से जमीन की रिजर्व प्राइस के हिसाब से कुल कीमत की एक प्रतिशत राशि जमा की जाएगी जो लैंडयूज बदलने के एक साल में निर्माण नहीं कराने पर जब्त कर ली जाएगी।