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डिस्काम डेढ़ हजार करोड़ के घाटे में

अजमेर. अजमेर बिजली कंपनी गत वित्तीय वर्ष में डेढ़ हजार करोड़ के घाटे में रही है। इस घाटे से उबरना अब कंपनी के लिए आसान नहीं होगा। कंपनी का दावा है कि तीन साल में 10 फीसदी छीजत कम कर दी है, मगर छीजत का आर्थिक स्वरूप मोटे घाटे के रूप में सामने आया है।

कंपनी की छीजत तीन साल पहले 42 प्रतिशत थी, यह घटकर गुजरे वित्तीय वर्ष में 37 प्रतिशत हो गई। कंपनी के मुताबिक जून 08 तक यह छीजत 32.4 प्रतिशत तक आ गई है। 1 प्रतिशत छीजत कम से कम 26 करोड़ का नुकसान देती है।

कंपनी के पदाधिकारियों के मुताबिक छीजत का प्रमुख कारण बिजली की उपलब्धता नहीं होना भी रहा है। इसकी पूर्ति के लिए बाहरी राज्यों से बिजली की खरीद की गई। गुजरे वित्तीय वर्ष में करीब 3400 करोड़ रुपए की बिजली खरीदी गई।

खरीदी गई बिजली की दर 6 से 8 रुपए प्रति यूनिट के बीच थी, जो काफी महंगी साबित हुई। छीजत का प्रमुख कारण बिजली चोरी रोकने में नाकामी भी रही। चित्तौढ़, झुंझुनूं, सीकर और नागौर जिले अजमेर डिस्कॉम के लिए नुकसानदायक साबित हुए।

पुष्कर समेत विभिन्न सब डिवीजनों में इंजीनियरों द्वारा नियमों के विपरीत बिजली भार बढ़ा देने से भी छीजत में इजाफा हुआ, क्योंकि जिस रफ्तार से इंजीनियरों ने बिजली भार बढ़ाया, उसके मुकाबले राजस्व की वसूली नहीं हो पाई। यहां तक की बिजली चोरी पकड़ने और राजस्व वसूलने के लक्ष्य भी 40 फीसदी इंजीनियर ही पूरे कर पाए। डिस्कॉम क्षेत्र में अब तक करीब तीन सौ करोड़ डिस्कॉम का उपभोक्ताओं में अटका हुआ है।





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