हिसारजम्मू कश्मीर के कटरा क्षेत्र में हॉर्स फ्लू का प्रकोप होने से जहां वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालुओं को चढ़ाई चढ़ने में टट्टुओं की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, वहीं एहतियात के तौर पर सेना ने समूचे उत्तरी क्षेत्र की एनिमल ट्रांसपोर्ट यूनिटों को सतर्क कर दिया है। अभी तक कटरा क्षेत्र में अलावा देश में कहीं भीहॉर्स फ्लू का कोई केस सामने नहीं आया है, लेकिन सैनिक व असैनिक क्षेत्रों में बीमार मिलने वाले घोड़ों पर विशेष निगरानी की हिदायत दी गई है।
कटरा में घोड़े, खच्चर व टट्टुओं में इक्वाइन एनफ्लूएंजा जिसे साधारण बोलचाल में हॉर्स फ्लू भी कहते हैं, का जबरदस्त प्रकोप है। इस बात की पुष्टि कटरा से लौटे राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र (एनआरसीई) हिसार के वैज्ञानिकों ने की है। केंद्र के निदेशक डा. एसके द्विवेदी ने बताया कि कटरा क्षेत्र में 18 हजार घोड़े व ख"ार पंजीकृत हैं। इनमें करीब दस हजार हॉर्स फ्लू के विषाणु से प्रभावित हैं। डा. द्विवेदी ने बताया कि जम्मू एवं कश्मीर के पशुपालन विभाग के निदेशक डा. एचपी शर्मा की सूचना पर केंद्र के चार वैज्ञानिकों का दल गत पखवाड़े में कटरा गया था।
केंद्र के विषाणु विज्ञान विभाग के इंचार्ज डा. बीके सिंह के नेतृत्व में गए इस दल में डा. बीआर गुलाटी, डा. नितिन बिरमानी व डा. संजय कुमार शामिल थे। वैज्ञानिकों के दल ने कटरा क्षेत्र में तीन दिन तक 128 बीमार घोड़ों व ख"ारों नेजल स्वेब लिए। केंद्र की लैब में जब नेजल स्वेब की जांच की गई तो 80 फीसदी में हॉर्स फ्लू पॉजिटिव पाया गया। केंद्र ने अपनी जांच रिपोर्ट जम्मू के पशुपालन विभाग के उ"ाधिकारियों व केंद्र सरकार को भेज दी है। हिसार स्थित देश के सबसे बड़े आर्मी अश्व केंद्र के सभी घोड़े इक्वाइन एनफ्लूएंजा से सुरक्षित हैं।
केंद्र के डिप्टी कमांडेट कर्नल राजीव चौधरी ने बताया कि यहां हॉर्स फ्लू का कोई केस नहीं है। कर्नल चौधरी ने बताया कि कटरा में हॉर्स फ्लू फैलने की सूचना मिलने के बाद केंद्र में पहले से ज्यादा एहतिहात बरती जा रही है। उल्लेखनीय है कि इस केंद्र में आर्मी के 2 हजार से भी अधिक अश्व हैं।
दो दशक बाद हुआ इक्वाइन एनफ्लुएंजा का प्रकोप
राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ विज्ञानी डा. प्रवीण मलिक के मुताबिक देश में इक्वाइन एनफ्लूएंजा का प्रकोप करीब दो दशक बाद देखने को मिला है। इससे पहले सन 1987 में इक्वाइन एनफ्लूएंजा का प्रकोप देखने का मिला था। उस वक्त 83 हजार घोड़े व ख"ार इसकी चपेट में आ गए थे और इससे सैकड़ों घोड़ों की मौत हो गई थी।
हॉर्स फ्लू विषाणु रोधी वैक्सीन उपलब्ध
राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केंद्र के विज्ञानी डा. बीके सिंह के मुताबिक इक्वाइन एनफ्लूएंजा के विषाणु रोधी वैक्सीन इस केंद्र द्वारा 1991 में इजाद कर ली गई थी। यह वैक्सीन स्वस्थ घोड़ों को लगाने से उनका हॉर्स फ्लू से बचाव हो जाता है।
क्या होता है हॉर्स फ्लू
हार्स फ्लू जिसे इक्वाइन एनफ्लूएंजा कहते हैं, एक ऐसा वायरस है जो मुख्यतया घोड़ा, खच्चर, टट्टू व गधों को अपनी चपेट में लेता है। यह वायरस पीड़ित पशु की सांस से हवा के जरिए तेजी से फैलता है। इस वायरस से पीड़ित जानवर की नाक से पानी बहता है तथा उसे 105 डिग्री फॉरेहनाइट का बुखार हो जाता है। पीड़ित पशु शारीरिक तौर पर बेहद कमजोर हो जाता है। जानवर का शीघ्र उपचार नहीं किया जाए तो उसमें कीटाणुओं का इंफेक्शन होने का खतरा हो सकता है। कीटाणुओं के इंफेक्शन से ग्रस्त जानवर की मौत हो सकती है। हार्स फ्लू से पीड़ित पशु को हमेशा अलग रखा जाता है, ताकि स्वस्थ पशु उसके प्रभाव में न आएं। इस वायरस से मनुष्यों व घोड़ा प्रजाति के अलावा अन्य जानवरों को कोई खतरा नहीं होता।