जोधपुर.
गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर सूर्यनगरी काशी के रूप में नजर आई। शहर से दूर सुरमयी पहाड़ियों में बने शिवालयों के अलावा आश्रमों में भी भक्तों का रैला गुरु चरणों में शीश नवाता नजर आया।
परकोटे से करीब आठ किमी दूर कायलाना की पहाड़ियों में स्थित सिद्धनाथ महादेव दादा दरबार के मठ में शहरवासी दर्शन के लिए उमड़ पड़े। कोई यहां घूमने आया तो कोई श्रद्धा से दादा दरबार के मत्था टेकने के लिए पैदल चलकर आया। साढ़े तीन सौ सीढ़ियों के लंबे सफर में दो वर्ष का बच्चा हो या फिर 90 साल का वृद्ध सभी दादा दरबार में गुरु के दर्शनों को आतुर नजर आए। पहाड़ी पर जिधर नजर घुमाओं, उधर भक्त दादा दरबार के जयकारे के साथ आगे बढ़ रहे थे। भक्तिमय माहौल से सराबोर यह नजारा शुक्रवार को देर रात तक रहा।
शाम को सैलाब उमड़ा
गर्मी के कारण एक से चार बजे तक श्रद्धालुओं की भीड़ थोड़ी कम हुई, लेकिन पांच-छह बजे से चौपासनी रोड से करीब डेढ़ किमी अंदर तक सीढ़ियां शुरू होने से पहले तक श्रद्धालुओं की रेलमपेल हो गई। सीढ़ियों में पुलिस एवं स्काउट्स के गाइड्स व्यवस्था संभाले हुए थे।
प्रसादी वितरण
तीर्थ स्थल पर सैकड़ों साधुओं को प्रसादी वितरण एवं भोजन आदि के बाद सीख में नए वस्त्रों के साथ दक्षिणा और फल भी वितरित किए गए।
तपोस्थली भूमि सिद्धनाथ
कभी हिंसक जानवरों से पहचाना जाने वाला सिद्धनाथ अब तपोस्थली के रूप में विख्यात हो चुका है। वषरे पहले एक साधु नारायण स्वामी ने छोटी सी गुफा में सालों तक तपस्या की। वे वर्ष 1920 में यहां आए एवं 1966 में अपना शरीर छोड़ गए। हिंसक जानवरों के विचरण करने से पूर्व लोग यहां जाने से कतराते थे, लेकिन अब हर दिन श्रद्वालुओं का तांता लगा रहता है। इसके बाद इनके शिष्य नेपाली बाबा ने तपस्या की और पहाड़ी को काटकर सीढ़ियों और जीर्णोद्धार का निर्माण किया।
चरण पादुका का अभिषेक
श्रद्धालुओं ने यहां पर नारायण स्वामी एवं नेपाली बाबा की चरण पादुका का अभिषेक किया। भक्तों ने दादा दरबार की जय व हर-हर महादेव के जयकारे लगाते हुए हाथों में मालाएं, नारियल और मिठाई का प्रसाद चढ़ाया। सुबह 9 बजे से धूणो, महादेव मंदिर, नारायण स्वामी एवं नेपाली बाबा की समाधि के सामने महिलाओं, पुरुषों के साथ युवाओं की लंबी लाइनें लगनी शुरू हो गईं जो देर रात तक जारी रही।
समन्वय धाम में की पूजा अर्चना
गुरु पूर्णिमा के अवसर पर शुक्रवार को कमला नेहरू नगर स्थित समन्वय धाम में सत्यमित्रानंद गिरि महाराज की पूजा-अर्चना हुई। श्रद्धालुओं ने संतश्री के प्रवचनों की कैसेट सुनी और सद्रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। लोकेशानंद गिरि की चरण पादुकाओं की भी पूजा की गई।
गुरु की आज्ञा की अवहेलना न करें
श्री जैन श्वेतांबर खरतरगच्छ संघ की ओर से शास्त्रीनगर स्थित सिद्धार्थ पैलेस में गुरु पूर्णिमा समारोह रखा गया। जनसमुदाय को संबोधित करते हुए साध्वी जयप्रभा की सुशिष्या साध्वी डॉ. संयम ज्योति ने कहा कि हर संस्कृति के साथ कुछ ऐसे स्वर्णिम और स्मरणीय दिवस जुड़े होते हैं, जिन्हें लोग पर्व की सज्ञा देते हैं। साध्वी ने बताया कि गुरु पूजा का अर्थ यह नहीं कि फल-फूल नैवेद्य लेकर धूप दीप थाली में सजाकर गुरु की आरती करना। गुरु का अर्थ है उनकी आज्ञा का पालन करना।
गुरु शिष्य का संबंध श्रेष्ठ
राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय में राष्ट्रीय सेवा योजना की ओर से गुरु पूर्णिमा का पर्व सादगी से मनाया गया। कुलपति प्रो. बनवारीलाल गौड़ ने कहा कि गुरु शिष्य का संबंध श्रेष्ठ है। ज्ञान जिस स्रोत से भी मिले, उसे ग्रहण करे। ज्ञान देने वाला गुरु है। गुरु का सदा आदर करें। कार्यक्रम में उगमदान रतनू, डॉ. प्रेमचंद शर्मा, जयसिंह राठौड़, महेश इंद्रा, राधेश्याम कलावटिया ने भाग लिया।
तेरापंथ धर्मसंघ का स्थापना दिवस
श्री जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा के तत्वावधान में शुक्रवार को तेरापंथ धर्म संघ का स्थापना दिवस हषरेल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर आचार्य श्री महाप्रज्ञ की विदुषी शिष्या साध्वी नगीना ने कहा कि तेरापंथ का अभ्युदय कोई आकस्मिक घटना या आंदोलन नहीं बल्कि पुरुषार्थ की कहानी है। इस अवसर पर साध्वी पद्मावती, मेरू प्रभा, गवेषणा, मयंक प्रभा, पुष्पावती सहित अनेक वक्ताओं ने अपने विचार व्यक्त किए।