उदयपुर. मार्बल आयात लाइसेंस लेने का रास्ता साफ होने के बाद अब लाइसेंस लेने की होड़ लग गई है। राज्य में आयात का लाइसेंस लेने वाले दो सौ से अधिक दावेदार हैं, जिनमें पचास से ज्यादा उदयपुर संभाग के हैं।
विदेश व्यापार विभाग ने मार्बल आयात के लिए फार्म जमा कराने की अंतिम तिथि एक अगस्त से बढ़ाकर 14 अगस्त कर दी है। विदेश व्यापार मंत्रालय की ओर से जारी संशोधन से राज्य से मार्बल का निर्यात करने वालों को फायदा होगा। लाइसेंस के लिए फार्म महानिदेशालय विदेश व्यापार (डीजीएफटी) की साइट से भी डाउनलोड किया जा सकता है।
लाइसेंस के लिए व्यापारियों को कोड नंबर देना होगा। जो विभाग के जयपुर कार्यालय से मिलेगा। गैंगसा मालिक तीन हजार मैट्रिक टन आयात का लाइसेंस ही ले सकेंगे। दो गैंगसा के मालिकों को दूसरे गैंगसा पर डेढ़ हजार मैट्रिक टन का लाइसेंस देने का प्रावधान रखा है। 9 जुलाई को त्नभास्करत्न में त्नमार्बल आयात नीति का बड़े घरानों को फायदात्न शीर्षक से प्रकाशित समाचार के बाद विदेश व्यापार मंत्रालय ने आयात नीति में संशोधन किए हैं।
16 जुलाई 07 को जारी संशोधन पत्र में फार्म एच में की गई बिक्री, मार्बल ब्लॉक्स के जॉब वर्क पर कटिंग, एक्साइज ड्यूटी, बिक्री कर को भी शामिल किया गया है। इससे लाइसेंस लेने वालों की कतार लंबी हो गई है। पूर्व में एक करोड़ से अधिक टर्न ऑवर वाली इकाइयों के लिए ही लाइसेंस का प्रावधान रखा गया था।
ट्रेडर्स का संघर्ष : ट्रेडर्स निर्यातकों के लिए अब भी आयात नीति में कमियां हैं। मार्बल एसोसिएशन के नेतृत्व में एक बार फिर वाणिज्य मंत्रालय को ज्ञापन देने की तैयारी की जा रही है। अब भी पूरे देश में मार्बल व्यवसाइयों के आयात की सीमा 1 लाख 10 हजार मैट्रिक टन ही है जबकि सिल्वासा के 200 व्यापारियों को एक लाख 40 हजार मैट्रिक टन आयात का प्रावधान किया गया है।
इनका कहना है
मार्बल आयात के आवेदन की तिथि 15 अगस्त तक बढ़ा दी गई है। नए संशोधन के हिसाब से आयातक अब सीधे ब्लॉक्स नहीं बेच सकेंगे।
-पवन तलेसरा, आयात-निर्यात सलाहकार
नीति में संशोधन करके विरोधाभास को खत्म करने की कोशिश की गई है मगर हमारी मांग ओपन जनरल लाइसेंस (ओजीएल) करने की है।
-श्याम नागौरी, अध्यक्ष मार्बल एसोसिएशन