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Shekhawati Shekhawati सीकर. नए परिसीमन के कारण खंडेला विधानसभा क्षेत्र के कुछ इलाके इधर-उधर हुए हैं। चुनावों में इनका सीधा असर नजर आएगा। इस वजह से आगामी चुनावों में वर्तमान विधायक महादेवसिंह के लिए राह आसान होगी या कठिन यह कह पाना मुश्किल है। इसका कारण यह है कि जो इलाके खंडेला से बाहर हुए हैं वे कांग्रेस के गढ़ रहे हैं साथ ही जो क्षेत्र नए जुड़ें हैं उनमें किसी भी दल की स्थिति साफ नहीं हो रही है।
बकौल महादेवसिंह त्ननए एरिया में भी मेरे मतदाताओं से अच्छे रिलेशन हैं, मुझे तो फायदा ही होगा।त्न चुनावों के दौरान महादेवसिंह को अब तक भाजपा की अंतर्कलह का फायदा मिलता रहा है। महादेवसिंह का भले ही कुछ भी कहना हो लेकिन इस बार चुनावी जंग में उनकी राहें आसान नजर नहीं आ रही हैं।
भाजपा जहां इस बार दमखम के साथ उभर रही है वहीं माकपा ने भी अपना ग्राउंड बनाया है। बसपा भी पूरे जोश के साथ सीट को प्रभावित करने की जुगत में है। विधानसभा चुनाव में भाजपा से पूर्व प्रधान हनुमानसिंह आर्य, बंशीधर बाजिया, सुशीला खैरवा, पोकरमल सेपट की चर्चा है तो माकपा नेता सुभाष नेहरा भी मैदान में हैं। इस बार पूर्व प्रधान शिवदयाल पालीवाल ने बसपा का दामन थामा है।
अधिक वोटों का रिकार्ड भी महादेव के नाम
महादेवसिंह 9 फरवरी, 1978 को सरपंच बने। एक जून, 1980 को पहली बार विधायक बने। दुल्हेपुरा में जन्मे महादेवसिंह ने ब्यावर कॉलेज से एमए (अर्थशास्त्र) तक पढ़ाई की।1952 के विस. चुनाव से लेकर अब तक सर्वाधिक मत लेने का रिकार्ड भी महादेवसिंह के नाम ही रहा। खंडेला ने सन् 1993 में 50 हजार 198 वोट हासिल किए थे। सन् 1990 में पूर्व मंत्री गोपालसिंह खंडेला ने 47 हजार 992 वोट लिए थे।