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Chandigarh Chandigarh चंडीगढ़.आखिर तीन दिन में ऐसा क्या हो गया कि यूपीए के खिलाफ मतदान करने के लिए शिरोमणि अकाली दल को अपने सांसदों को व्हिप जारी करना पड़ गया। 15 जुलाई को मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने कहा था कि पार्टी के आठों सांसद एकजुट हैं, ऐसे में व्हिप जारी करने की जरूरत नहीं है लेकिन 18 जुलाई को बादल की भाषा बदली हुई थी। उन्होंने बताया, अकाली दल ने सांसदों को तीन लाइन का व्हिप जारी कर विश्वास मत पर सरकार के खिलाफ वोट डालने को कहा है।
दरअसल राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अकाली दल में मनमोहन सिंह के खिलाफ मतदान को लेकर गंभीर मतभेद हैं। विश्वास मत पर मतदान में तीन दिन बचे हैं और अभी तक बादल इन मतभेदों को दूर नहीं कर पाए हैं। पार्टी महासचिव और संसदीय दल के नेता सुखदेव सिंह ढींढसा ने तो एनडीए की मीटिंग में भाग लेने के बाद कुछ भी स्पष्ट कहने से इनकार कर दिया था। यही नहीं, एक-दो सांसदों के खुलकर मनमोहन का पक्ष लेने से पार्टी परेशान है। सूत्रों का कहना है कि चूंकि मनमोहन पहले सिख प्रधानमंत्री हैं इसलिए अकाली सांसद उनके खिलाफ वोट नहीं देना चाहते।
श्री अकाल तख्त साहिब और श्री केसगढ़ साहिब के जत्थेदारों ने भी सांसदों से मनमोहन के पक्ष में मतदान करने की अपील की थी। इससे भी पार्टी संशय में हैं। वरिष्ठ नेताओं को उन सांसदों के पाला बदलने का डर सता रहा है जिनके टिकट इस बार कट सकते हैं।
वैसे आज तक अकाली दल में बादल ने जो भी कहा है, विधायकों-सांसदों और अन्य नेताओं ने उसका अक्षरश: पालन किया है। पार्टी की कमान सुखबीर को सौंपने के बाद पहली बार बादल को महसूस हुआ है कि उनके सांसद क्रॉस वोटिंग कर सकते हैं। यही वजह है कि पार्टी को व्हिप जारी करना पड़ा।