नई दिल्ली.वित्त मंत्री पी चिंदबरम ने विश्व बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उबाल का ठीकरा सटोरियों के सर फोड़ा है। शनिवार को एक न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में वित्त मंत्री ने कहा कि क्रूड की कीमतें 60 डालर से ऊपर जाने के लिए सट्टात्मक प्रवृत्ति ही जिम्मेदार है।
क्रूड के दाम नियत दायरे में रखकर नियंत्रित करने का सुझाव देने वाले चिदंबरम ने कहा, इस बात के पुख्ता प्रमाण हैं कि वायदा बाजार और सटोरिए ही कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ला रहे हैं। चिदंबरम ने सऊदी अरब द्वारा गत माह जेद्दाह में बुलाई गई विश्व के बड़े तेल उत्पादक और उपभोक्ता देशों की बैठक में क्रूड की कीमतें तय मूल्य दायरे में रखकर नियंत्रित करने की बात कही थी।
तेल कंपनियों को आयल बांड:
क्रूड की कीमतों में तेजी के कारण घरेलू सरकारी तेल कंपनियों पर घाटे का बोझ बढ़कर 2.46 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया था। सरकार द्वारा पेट्रोल-डीजल के दाम क्रमश: 5 व 3 रुपए प्रति लीटर और एलपीजी सिलेंडर के दाम 50 रुपए बढ़ाए जाने के बावजूद यह मूल्य वृद्धि अपेक्षित मूल्य वृद्धि का 20 फीसदी ही है। चिदंबरम ने कहा कि कीमतों के इस अंतर को आयल बांड जारी करके पूरा किया जाएगा।
ईधन की कीमतों में मूल्य वृद्धि कब होगी? इस सवाल का जवाब देने से वित्त मंत्री ने साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि फैसला उनके कार्यक्षेत्र में नहीं आता है। यह फैसला पेट्रोलियम मंत्रालय और कैबिनेट करती है।
ईपीएफओ बाजार में धन लगाए:वित्त मंत्री ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) को सुझाव देते हुए कहा है कि वह अपने 4 करोड़ से अधिक सदस्यों को बेहतर रिटर्न देने के लिए बाजार के उच्च प्रतिफल देने वाले साखपत्रों में निवेश कर सकता है।
महंगाई बढ़ने के कारण ईपीएफ ब्याज दरों में बढ़ोतरी के सवाल पर वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ‘विशेष जमा योजना’ (एसडीएस) की ब्याज दर नहीं बढ़ा सकती है। ईपीएफ का एक बड़ा हिस्सा एसडीएस में लगा हुआ है।