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बेटी के दहेज की राशि खा रहे हैं नेता!

शिवपुरी. गरीब बेटियों के हाथ पीले करने के लिए लागू की गई मुख्यमंत्री कन्यादान योजना सत्तारूढ़ दल के नेताओं के लिए दुधारू गाय साबित हो रही है। इस योजना के तहत सामूहिक विवाह कराने की जिम्मेदारी स्वयंसेवी संस्थाओं को सौंप रखी है और इन संस्थाओं के पीछे सत्तारूढ़ दल के नेता खड़े हैं जो शासन द्वारा दी जाने वाली दहेज की राशि में कटौती कर अपनी जेब भर रहे हैं।

दरअसल, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत गरीब कन्याओं के हाथ पीले करने के लिए प्रत्येक जोड़ा पांच हजार रुपए और विवाह कार्यक्रम के लिए एक हजार रुपए का बजट सामाजिक न्याय विभाग को दिया गया है। गुजर साल सामाजिक न्याय विभाग ने जनपद पंचायतों के अधीन यसामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजित कर करीब 14 सैकड़ा कन्याओं के हाथ पीले किए।

नए वित्तीय वर्ष में सामूहिक विवाह सम्मेलन की जवाबदेही स्वयंसेवी संस्थाओं को सौंप दी गई और इसकी शुरूआत शिवपुरी से हुई, जहां एक महिला संस्था को इसकी जवाबदेही सौंपी गई। इसके बाद तो जिले में निजी संस्थाओं को विवाह सम्मेलन कराने का सिलसिला प्रारंभ हुआ। अकेले जुलाई माह में करीब सात सैकड़ा से अधिक विवाह प्रशासन ने स्वयंसेवी संस्थाओं को एजेंसी तय कर कराए हैं।

चिंता का सवाल ये है कि आखिर ये संस्थाएं विवाह कराने के लिए इतनी उतावली क्यों हैं.? वजह साफ है, एक जोड़े के मान से मिलने वाली छह हजार रुपए की राशि में से आधी से अधिक राशि इन संस्थाओं के पीछे खड़े नेता हजम कर जाते हैं।

छह की जगह दिया एक हजार का सामान
पिछोर में 9 जुलाई को एक स्वयंसेवी संस्था द्वारा एक सैकड़ा से अधिक कन्याओं के विवाह कराए। इसमें प्रत्येक जोड़े से रजिस्ट्रेशन के नाम पर एक-एक हजार वसूल किए गए और विवाह समारोह के बाद वर-वधुओं को दहेज के रूप में भी सरकार की ओर से पांच हजार का सामान ने देते हुए महज एक हजार रुपए मूल्य का ही सामान दिया गया।

पिछोर के विधायक केपी सिंह भी गड़बड़ी की आशंका से इनकार नहीं करते हैं। पूर्व मंत्री लक्ष्मीनारायण गुप्ता का तो साफ कहना है कि सामूहिक विवाह सम्मेलन में भारी भ्रष्टाचार हुआ है। जिस संस्था ने ये कार्यक्रम किया, उसने प्रत्येक जोड़े से एक-एक हजार रुपए रजिस्ट्रेशन के नाम पर ले लिए और ऐसी महिलाओं के विवाह करा दिए गए, जो कि पूर्व से ही शादीशुदा थे।

जांच हुई तो उजागर होगी असलियत
गत 7 जुलाई को शिवपुरी में हुए सामूहिक विवाह सम्मेलन में वर-वधुओं को जो सामान दिया गया, वह गुणवत्ता रहित बताया गया है। कुछ लोगों का आरोप है कि विवाह समारोह में व्यवस्थाओं के नाम पर एक-एक हजार रुपए प्रत्येक जोड़े के हिसाब से खर्च बताए गए हैं, लेकिन भोजन आदि की व्यवस्थाएं ठीक नहीं थीं। इसी प्रकार बदरवास और खनियांधाना में इस माह हुए सामूहिक विवाह सम्मेलनों में दहेज के नाम पर न के बराबर सामान वर-वधुओं को प्रदाय किया गया। इसके बाद बिल भी इन संस्थाओं ने जनपद पंचायतों में पेश कर दिए हैं।

दहेज के सामान से कमीशन की बू
कन्यादान योजना के तहत कराए जाने वाले विवाह समारोह में वर-वधुओं को पांच हजार रुपए की राशि से पलंग, सूटकेस, वधु के गहने, साड़ी आदि सामान देना होता है, पर निजी संस्थाओं ने इसके एवज में ऐसी सामग्री दी, जिसकी गुणवत्ता पर संदेह है और उससे कमीशनखोरी की बू आ रही है।

बदरवास में 13 जुलाई को हुए सामूहिक विवाह सम्मेलन में भी दहेज का सामान घटिया स्तर का वितरित किया गया। खास बात यह है कि कोलारस में हुए विवाह सम्मेलन को तो अनुमति ही नहीं दी गई। इसकी वजह यह रही कि आयोजन कराने वाला व्यक्ति सत्तारूढ़ दल से निलंबित है और उसे पार्टी का सहयोग नहीं है।

अब तक हुए 2270 विवाह
जिले में इस योजना के तहत अब तक 2270 विवाह किए गए हैं। इस वित्तीय वर्ष में हुए विवाह की संख्या आठ सैकड़ा के करीब है। सामाजिक न्याय विभाग के संचालक एचआर वर्मा का कहना है कि इस साल हुए विवाह समारोहों की राशि का भुगतान नहीं किया गया है। यदि गड़बड़ी की शिकायतें सही परइ र्गइ तो संस्थाओं का भुगतान रोक दिया जाएगा।

कलेक्टर कहते हैं
कलेक्टर मनीष श्रीवास्तव का कहना है कि निजी संस्थाओं को सामूहिक विवाह की जवाबदेही इसलिए दी गई, ताकि अधिक से अधिक कन्याओं के हाथ पीले किए जा सकें। अब तक किसी निजी संस्था द्वारा सामग्री में कमीशनखोरी की शिकायतें पुष्ट नहीं हरुइ हैं, पर यदि ये सही परइ र्गइ तो अपर कलेक्टर से जांच कराकर संबंधित संस्था को निरस्त करने की कार्रवाई के साथ इन संस्थाओं से कन्यादान योजना की धनराशि वसूल की जाएगी।

भुगतान रोका जाएगा
जिले के सामाजिक न्याय विभाग के उपसंचालक श्री वर्मा का कहना है कि स्वयंसेवी संस्थाओं को विवाह समारोह करने की अनुमति इसलिए दी गई, क्योंकि जनपद पंचायतों के सीईओ मेहनत नहीं करना चाहते। उनसे कई बार इस बाबत कहा गया, पर वे इसके लिए तैयार नहीं हैं। पर यदि निजी संस्थाओं ने योजना के तहत दिए जाने वाले दहेज में पैसा खाया है तो इन संस्थाओं का भुगतान रोका जाएगा।





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