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एक वारिस, तीन खाते

इंदौर. ये तीन समस्याएं तो सिर्फ उदाहरण हैं। शनिवार को निगम द्वारा बिलावली जोन पर हुए अहिल्या समाधान शिविर में बिलों में गलती की साढ़े चार सौ से ज्यादा शिकायतें आईं। महापौर डॉ. उमाशशि शर्मा ने आश्वस्त किया कि दिन में सभी शिकायतों का निराकरण कर देंगे।

महापौर डॉ. शर्मा, आयुक्त नीरज मंडलोई और राजस्व प्रभारी सपना चौहान की मौजूदगी में शिविर सुबह 9.30 बजे से शुरू हुआ। थोड़ी ही देर में उन शिकायतकर्ताओं की भीड़ इकट्ठा हो गई जो बिल में सुधार के लिए महीनों से जोन और मुख्यालय के चक्कर काट रहे हैं। अहिल्या विकास शिविर में भी तकरीबन पांच करोड़ के 56 प्रस्तावों को हरी झंडी मिली।

इसी दौरान ट्रांसपोर्टनगर और मैकेनिकनगर के व्यापारियों ने भी क्षेत्र की दुर्दशा के विरोध में महापौर को घेर लिया। थोड़ी हुज्जत भी हुई लेकिन बाद में उन्होंने शांतिपूर्वक प्रस्ताव रखते हुए कहा मेनरोड को छोड़ बाकी सड़कों के लिए जनसहयोग देने के लिए तैयार हैं। वहीं महापौर ने भी स्पष्ट कर दिया कि बगैर जनसहयोग के निगम मेनरोड नहीं बना सकता।

वैसे भी इंदौर विकास प्राधिकरण गैरयोजना मद में मेनरोड बनाने की तैयारी कर चुका है। इंदौर मोटर पार्ट डीलर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष बलजीतसिंह साहनी ने बताया ख्97फ्-7ब् में निगम को हस्तांतरित होने के बाद ट्रांसपोर्टनगर-मैकेनिकनगर की सड़कें नहीं बनीं। बाद में पार्षद बलराम वर्मा और भागसिंह सैनी ने व्यापारियों को समझाइश देकर मामला शांत किया।

भौतिक सत्यापन के इंतजार में धूल खा रहे थे दस्तावेज
वार्ड-59 के बीपीएल परिवारों के भौतिक सत्यापन के आदेश आयुक्त ने 25 मई को 15 दिन की समयसीमा तय करते हुए दिए थे लेकिन सत्यापन नहीं हुआ। लोगों की शिकायत पर महापौर, जोन प्रभारी पराग लोंढ़े और क्षेत्रीय पार्षद अरविंद बागड़ी ने जब जोन की अलमारी खोली तो दस्तावेज धूल खाते मिले। नाराज महापौर ने फटकार लगाते हुए कर्मचारियों को चार दिन में भौतिक सत्यापन करके रिपोर्ट जारी करने के निर्देश दिए।





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