इंदौर.
अब बैंकों की हड़ताल, शहर बंद हो या कर्फ्यू। जैसे ही क्लियरिंग हाउस खुलेगा, एक ही दिन में लगभग सारे रुके हुए चेक क्लियर हो जाएंगे। स्टेट बैंक ऑफ इंदौर द्वारा संचालित समाशोधन गृह ने एक ऐसी अत्याधुनिक मशीन खरीदी है जो एक मिनट में 580 चेक की जांच-पड़ताल करती है।
एक करोड़ 80 लाख रुपए कीमत वाली माइकर रीडर इमेजिन एंड सारटर नाम की यह मशीन यूएस से मंगवाई गई है। एक सेकंड में यह 10 चेक की जांच कर लेने की क्षमता रखती है। इस मशीन के आने से बैंकों से चेक स्वीकार करने का समय भी दो घंटे बढ़ा दिया है। अब शाम 6 के बजाय रात 8 बजे तक चेक लिए जाते हैं।
समाशोधन गृह प्रबंधक अभिमन्यु शुक्ला ने बताया इस मशीन के आ जाने से कामकाज में काफी राहत मिली है। करीब 50 हजार चेक रोजाना आते हैं। पहले एक-एक चेक की जांच-पड़ताल करना पड़ती थी। चेक क्लियर होने में तीन से चार दिन भी लग जाते थे। कर्मचारियों पर काम का बोझ भी खूब रहता था।
ऐसे करती है काम
12 फीट लंबी मशीन में 70 विभिन्न बैंक के अलग-अलग सेक्शन हैं। चेक इकट्ठे करने के बाद मशीन के पहले सेक्शन में सारे चेक डाल दिए जाते हैं। फिर हर बैंक व ब्रांच का चेक अलग हो जाता है और संबंधित सेक्शन में चले जाता है। चेक सेविंग अकाउंट का है या करंट का, यह पता लगा लेने के बाद क्रेडिट और डेबिट कर देती है।
हिसाब रखने की जरूरत नहीं
बैंकों से क्लियरिंग टैक्स वसूलने के लिए पहले हर बैंक का हिसाब-किताब रखना पड़ता था। अब महीना पूरा होने पर मशीन ही टैक्स का गुणा-भाग कर लि स्ट दे देती है। हर बैंक का हिसाब मशीन ही मेनटेन करती है। मैनुअल हिसाब करने में गड़बड़ हो जाती थी पर अब इसकी संभावना नहीं के बराबर रह गई है।
कर्फ्यू के बाद किया था प्रयोग
पिछले दिनों कफ्यरू की वजह से करीब पांच दिन बैंक बंद रही थी। कुल 880 करोड़ के चेक प्रभावित हुए थे। पहले ही दिन जब मशीन ने काम करना शुरू किया तो 550 करोड़ के चेक क्लियर हो गए थे। इसमें 15 करोड़ के चेक बाउंस हो गए थे। चूंकि इस दिन समाशोधन गृह कुछ देरी से शुरू हुआ था, अन्यथा इसी दिन सारा लोड खत्म हो जाता।