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चट्टानों पर अत्याचार

भोपाल. stone जाने-अनजाने में राजधानी के बाशिंदे शहर की खूबसूरती से छेड़छाड़ कर रहे हैं। पहाड़ों और झीलों के लिए पहचाने जाने वाले इस शहर में चट्टानों पर कहीं विज्ञापन लिखे हुए हैं, तो कहीं स्लोगन। प्रकृति से खिलवाड़ के इस पाप में आम लोगों के साथ सरकार भी बराबर की जिम्मेदार है।

हिमालय की पहाड़ियों पर एक शीतल पेय कंपनी द्वारा किए गए विज्ञापनों को उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद हटा दिया गया था। कर्नाटक में पहाड़ों पर विज्ञापन के खिलाफ भी सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष-2002 में ऐसा ही आदेश दिया था।

राजधानी के कुछ पर्यावरणविदों ने शहर में चट्टानों के साथ हो रही ज्यादती की ओर दैनिक भास्कर का ध्यान आकृष्ट कराया। भास्कर संवाददाता ने शनिवार को जब शहर के कुछ क्षेत्रों का मुआयना किया तो एहसास हुआ कि चट्टानों के संरक्षण के बारे में सोचना होगा, अन्यथा यह पहाड़ अपना मूल स्वरूप खो देंगे।

कहां क्या स्थिति
वीआईपी रोड चौराहे पर लगी प्राकृतिक चट्टान पर सरकार की शिक्षा संबंधी योजना की ताम्र प्लेट लगी हुई है। इसी सड़क पर एक चट्टान पर पेंटिंग करके उसका मूल स्वरूप बिगाड़ दिया गया है। मनुआभान की टेकरी पर कुछ मनचलों ने अपने नाम लिखकर यहां की चट्टानों को बिगाड़ दिया है। बिड़ला मंदिर की पहाड़ी का उपयोग कुछ निजी एजेंसियां अपने विज्ञापन के लिए कर रहीं हैं। केरवा डेम के आसपास की पहाड़ियों व अन्य स्थानों पर भी यह स्थिति देखी जा सकती है।

..तो नहीं बचेंगे पहाड़
प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष डा. एसपी गौतम ने माना कि चट्टानों के साथ हो रही इस छेड़छाड़ को रोका जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण मंडल इस मामले का परीक्षण कराएगा। चट्टानों पर पेंटिंग के लिए भी खास पेंट इस्तेमाल किए जाने चाहिए, जो उनकी मूल प्रकृति को नुकसान न पहुंचाए और यह क्षेत्र की चट्टान के लिए अलग-अलग होता है। पहाड़ हमारे पर्यावरण का जरूरी हिस्सा हैं, यदि हम चट्टानों को संरक्षित नहीं करेंगे तो पहाड़ नहीं बचेंगे ।

नई पीढ़ी को क्या दे रहे हैं?
इन्टेक की मीरा दास के अनुसार उच्चतम न्यायालय का फैसला भले ही राजधानी की पहाड़ियों और चट्टानों पर लागू नहीं होता, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि हमें इनसे छेड़छाड़ की अनुमति मिली हुई है। जिस शहर में हम रहते हैं उसकी विशेषताओं और प्रकृति को बरकरार रखना भी हमारी ही जिम्मेदारी है।

सरकारी एजेंसियों के साथ आम आदमी को भी इसका ख्याल रखना चाहिए। संस्था धरोहर की अध्यक्ष मोहिब अहमद ने कहा कि हम अपनी धरोहर को ही संरक्षित करने में सबसे कम रुचि लेते हैं। हमें यह सोचना चाहिए कि पुरखों ने तो हमें बहुत कुछ दिया, पर हम आने वाली पीढ़ियों को क्या दे रहे हैं?

हर संभव कोशिश करेंगे
इस बारे में महापौर सुनील सूद ने कहा कि चट्टानों को खूबसूरत बनाने के लिए ही पेंटिंग कराई गई थी। यदि पर्यावरणविद् ऐसा मानते हैं कि इन पेंटिंग से कोई नुकसान हो रहा है तो इसका परीक्षण करा लिया जाएगा। अब तक हमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश की जानकारी नहीं थी। राजधानी की खूबसूरती को बरकरार रखने के लिए नगर निगम हर संभव प्रयास करेगा।





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