भोपाल. केंद्रीय श्रम और रोजगार मंत्रालय ने मध्यप्रदेश सड़क परिवहन निगम (एमपीआर टीसी) को बंद करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।
परिवहन मंत्री हिम्मत कोठारी ने इस आदेश को राजनीति से प्रेरित बताया है। दूसरी तरफ कर्मचारी संघर्ष समिति ने सहकारिता के आधार पर एमपीआरटीसी के संचालन का दायित्व अपने हाथों में लेने के लिए शासन को प्रस्ताव सौंपा है। राज्य शासन ने औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 की धारा 24-0 (1) के तहत एमपीआरटीसी को बंद करने की अनुमति मांगी थी।
हाल ही में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के डायरेक्टर केएम गुप्ता ने एमपीआरटीसी के प्रबंध संचालक को पत्र लिखकर आदेश की जानकारी दी। राज्य सरकार एमपीआरटीसी को बंद करने के निर्णय के तहत कर्मचारियों को वीआरएस दे चुकी है।
हर महीने तीन करोड़ कमाकर देंगे : निगम उत्थान कर्मचारी संघर्ष समिति ने राज्य शासन को एमपीआरटीसी के संचालन का प्रस्ताव सौंपा है। समिति के सचिव श्यामसुंदर शर्मा के अनुसार समिति को यदि संचालन की अनुमति दी जाती है तो हर महीने तीन करोड़ का लाभ अर्जित किया जा सकता है।
एपीआरटीसी बंद करने का निर्णय सोच समझकर और मजबूरी में लिया गया था। श्रम और रोजगार मंत्रालय से अनुमति नियम सम्मत मांगी थी। मंत्रालय ने इनकार करने आदेश जारी कांग्रेस नेताओं के दबाव में लिया है।
-हिम्मत कोठारी, परिवहन मंत्री