भोपाल. निजी मेडिकल और डेंटल कालेजों में सत्र 2007-08 में प्रवेश लिए विद्यार्थियों को अब वर्तमान फीस कमेटी द्वारा फरवरी 08 में तय की गई फीस नहीं देनी होगी। इन विद्यार्थियों के लिए कमेटी नये सिरे से फीय तय करेगी। जबकि सत्र 06-07 में प्रवेश लिए विद्यार्थी जस्टिस द्विवेदी कमेटी द्वारा तय की गई फीस ही देंगे।
निजी मेडिकल और डेंटल कालेजों की फीस तय करने के मामले में जस्टिस वीके अग्रवाल की अपील प्राधिकरण ने प्रवेश एवं फीस विनियामक समिति द्वारा तय की गई फीस निरस्त कर दी है। अपील प्राधिकरण में विद्यार्थियों ने फीस कमेटी के फैसले के खिलाफ अपील की थी। कमेटी ने इन कालेजों की फीस पिछली फीस की तुलना में एक लाख रू तक बढ़ा दी थी।
निजी व्यावसायिक शिक्षण संस्थान प्रवेश एवं फीस अधिनियम 2007 के तहत बनाए गए अपील प्राधिकरण ने वर्तमान फीस कमेटी द्वारा तय की गई फीस को गलत करार दे दिया है। इस फैसले से फीस का विवाद फिलहाल समाप्त हो गया है।
प्राधिकरण के इस फैसले के बाद अब पिछले दो सालों में प्रवेश लिए छात्रों से ज्यादा ली गई फीस को समायोजित किया जाएगा। इस फैसले से जहां एक और मेडिकल और डेंटल कालेजों के विद्यार्थियों को राहत मिली है, वहीं निजी कालेजों को फिर एक झटका लगा है, क्योंकि कई निजी कालेज कमेटियों द्वारा तय की गई फीस से ज्यादा राशि वसूल रहे थे।
उधर फीस कमेटी भी इस फैसले से परेशानी में आ गई है क्योंकि फीस तय करने की सारी कवायद दोबारा करनी होगी। प्राधिकरण द्वारा शुक्रवार को दिए एक महत्वपूर्ण फैसले में अध्यक्ष जस्टिस वीके अग्रवाल ने कहा है कि फीस कमेटी को सत्र 07-08 से पहले के छात्रों के लिए फीस तय करने का अधिकार ही नही है। क्योंकि यह कमेटी जुलाई 07 में गठित की गई है। इसलिए सत्र 06-07 में प्रवेश लिए छात्रों पर जस्टिस द्विवेदी कमेटी द्वारा तय की गई फीस ही लागू की जा सकती है। गौर तलब है कि जस्टिस द्विवेदी कमेटी ने सत्र 04-05, 05-06, 06-07 के लिए फीस तय की थी।
यह कहा प्राधिकरण ने..
>> सुप्रीम कोर्ट के पीए इनामदार फैसले के अनुसार समिति सिर्फ आने वाले छात्रों के लिए ही फीस तय कर सकती है, पहले प्रवेश लिए छात्रों के लिए नहीं।
>> समिति को सत्र 07-08 में प्रवेश लिए और इसके बाद आने वाले छात्रों की फीस तय करने का अधिकार है।
>> पिछले चार सालों के आय व्यय के आधार पर आने वाले छात्रों के लिए फीस तय करना गलत।
>> वर्तमान समिति द्वारा सत्र 07-08 के छात्रों के लिए तय की गई फीस, नयी फीस तय होने तक अंतरिम मानी जाएगी। जिसे बाद में अंतर के अनुसार समायोजित किया जाएगा।
>> इस फैसले के आधार पर सत्र 07-08 के पहले प्रवेश लिए छात्रों द्वारा की गई अपीलों को स्वत: ही निरस्त मान लिया गया है, क्योंकि ऐसे छात्र वर्तमान कमेटी द्वारा तय >> गई फीस के दायरे में नही आते हैं।
>> कमेटी को फीस तय करने के आधार बिंदु नये सिरे से तय करना होंगे।
क्या तय हुई थी फीस..
>> डेंटल कालेज- अधिकतम 1 लाख 71 हजार
>> मेडिकल कालेज- अधिकतम 2 लाख 62 हजार
>> जस्टिस द्विवेदी कमेटी ने तय की..
>> डेंटल कालेज- 1 लाख 10 हजार
>> मेडिकल कालेज- 1 लाख 81 हजार
>> वसूली जा रही थी..
>> डेंटल कालेज- 1 लाख 85 हजार
>> मेडिकल कालेज- 2 लाख 80 हजार
प्राधिकरण ने फीस से जुड़े हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के बहुत से पुराने मामले और अधिनियम के प्रावधानों को ध्यान में रख कर फैसला लिया है। अधिनियम के मुताबिक फीस कमेटी और राज्य सरकार को यह फैसला मान्य होगा।
जस्टिस वीके अग्रवाल,अध्यक्ष, अपील प्राधिकरण
यह थी शिकायत..
वर्तमान फीस कमेटी द्वारा फरवरी 08 में तय की गई फीस को कालेजों और छात्रों ने चुनौती दी थी। कालेजों ने जहां नयी फीस को कम बताया था, वहीं छात्रों ने पिछले दो सालों की फीस तय करने के अधिकार को ही चुनौती दी थी। इस नजरिए से देखें तो इस मामले में वास्तव में छात्रों की जीत हुई है।
चार साल बाद तय हुई थी फीस..
फरवरी में तय की गई फीस भी चार साल बाद तय हो पाई थी। दरअसल सत्र 2004 से ही फीस की राशि को लेकर विवाद की स्थिति रही है। जस्टिस द्विवेदी और जस्टिस गुप्ता की कमेटी द्वारा तय की गई फीस से सहमत न हो पाने के कारण यह मामला कोर्ट तक पहुंचा था। इस बीच निजी संस्थाओं ने स्वयं ही फीस तय करके वसूलना शुरू कर दिया था, जिसे बाद में समायोजित करने की शर्त पर सुप्रीम कोर्ट ने भी सहमति दे दी थी। इसके बाद राज्य सरकार की फीस समिति ने फीस तय कर दी थी।