News
Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर. सात समंदर पार से वेटी वेबर के साथ छत्तीसगढ़ पहुंची निशा की आंखें अपने जन्मदाता को देखने के लिए व्याकुल हैं। 25 बरस पहले जर्मनी की वेबर दंपत्ति ने उसे गोद लिया था और उस दिन के बाद पहली बार उसके कदम यहां पड़े हैं। दिक्कत यह है कि जिस चिल्ड्रन होम से उसे गोद लिया गया था, वहां फिलहाल दस्तावेज नहीं मिल रहे हैं, इसलिए उसे अपने असली-माता से मिलने में दिक्कतें आ रही हैं।
निशा वेबर को गोद लेने वाली वेटी भी साथ आई हैं। उन्होंने बताया कि 10 जून 1983 को वह अपने पति एडगर वेबर के साथ भारत आई थीं। दिल्ली के होलक्रास चिल्ड्रन होम में उन्हें मासूम निशा का पता चला। दरअसल निशा को उसके माता-पिता कुनकुरी के मिशन हास्पिटल में छोड़ गए थे। जब वह एक साल की थी, तब वहां से उसे चिल्ड्रन होम भेजा गया था।
वेबर दंपत्ति ने कागजी औपचारिकता पूरी करने के बाद निशा को जर्मनी ले गए। वहीं वह पढ़ी-लिखी और सैटल हो गई। बड़ी होने पर निशा को जब पता चला कि उसे इंडिया से गोद लेकर यहां लाया गया है, मन में असली माता-पिता से मिलने की ख्वाहिंश हुई। वेटी वेबर ने अपनी गोद ली हुई बेटी की इच्छा का सम्मान किया और वे दिल्ली आ गए। यहां चिल्ड्रन होम में पता चला कि उसे कुनकुरी हास्पिटल से भेजा गया था और निशा नाम चिल्ड्रन होम का दिया हुआ है। और कोई दस्तावेज-रिकार्ड वहां नहीं हैं। परेशान हाल वेटी वेबर और निशा शहरों की खाक छान रहे हैं।
वे रायपुर भी आए और कुनकुरी अस्पताल भी जा रहे हैं। उन्होंने मिशनरी संस्थाओं से मदद मांगी है। निशा का कहना है, रिकार्ड मिला तो उसके माता-पिता के बारे में कोई न कोई क्लू मिल जाएगा। इतनी परेशानियों के बाद भी वह हताश नहीं है और पूरे मनोयाग से माता-पिता का क्लू ढूंढने में लगी है।
4 जुलाई को भारत पहुंची निशा अब तक देश के अनेक शहरों के होलीक्रास संस्थानों में अपने माता पिता के बारे में कुछ सुराग ढूंढने की कोशिश कर रही हैं। वे कुछ ही रोज में कुनकुरी के होलीक्रास हास्पिटल में जाकर अपने असल माता पिता की तलाश करेंगी। निशा ने बताया कि भारत में रहने का उनका वीजा 16 अगस्त तक मान्य है। इससे पहले वे हर संभव कोशिश करेंगी की उसे उनके माता पिता उन्हें मिल जाएं।