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Chhattisgarh
Raipur Raipur रायपुर.
बरसों की मेहनत के बाद रावांभाठा का ट्रांसपोर्टनगर अस्तित्व में आ गया, लेकिन वह उजाड़ पड़ा है। पांच दिनों बाद भी वह आबाद नहीं हो पाया। ट्रक र्ढे में सड़कों के किनारे खड़े हैं। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने टकों को खींचकर वहां लाने की चेतावनी भी दी, लेकिन ट्रांसपोर्टरों के कानों पर जू नहीं रेंग रही।
ट्रांसपोर्टनगर में 3000 ट्रकों के खड़े होने की क्षमता है। सोमवार को डा. रमन ने इसका लोकार्पण करते हुए उम्मीद जताई थी कि ट्रक अब बेतरतीब तरीके से सड़कों को जाम नहीं करेंगे। लेकिन ट्रांसपोर्टरों का रवैया नहीं बदला। ट्रांसपोर्टनगर खाली पड़ा है। आज वहां केवल आठ-दस ट्रक खड़े थे, जबकि रिंगरोड, भनपुरी समेत आसपास की सड़कों पर बेतरतीब ट्रकों ने मार्ग जाम कर रखा था।
छग ट्रक ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजिंदर सिंह बेनीपाल का कहना है कि सीएम ने ट्रक खींचवाने की चेतावनी दी है। उनके हाथ में शासन, प्रशासन है। कार्रवाई कर सकते हैं, लेकिन एसोसिएशन केवल भनुपरी इलाके के ट्रांसपोर्टरों को वहां ट्रक खड़े करने के लिए प्रेरित कर सकता है, दूसरे इलाकों के ट्रक मालिकों पर इसलिए दबाव नहीं डाल सकते कि वे अगर ट्रक लेकर वहां जाए तो जरूरी नहीं कि जगह मिल जाएगी। वैसे भी, ट्रक शहर के चारों ओर पार्क हो रहे हैं। रावांभाठा में बना ट्रांसपोर्टनगर छोटा है। समस्या से निजात तभी संभव है, जब शहर के चारों ओर ट्रांसपोर्टनगर बसाया जाए।
खाली पड़ा है
28 करोड़ खर्च कर 98 एकड़ में आरडीए द्वारा विकसित ट्रांसपोर्टनगर में 3000 ट्रकों की पार्किग की जगह होने के बाद भी केवल आठ-दस ट्रक खड़े हो रहे हैं। रिंगरोड और बिलासपुर रोड पर अब भी जाम के हालात हैं। इस संवाददाता ने पीक आवर में दोपहर 12 से 2 बजे तक बिलासपुर रोड, ट्रांसपोर्टनगर और रिंग रोड का जायजा लिया। बिलासपुर रोड पर भारी वाहनों की कतारों का सिलसिला खमतराई पुल पार करते ही शुरू हो गया।
खमतराई पुल से भनपुरी पुल तक 30 से ज्यादा गाड़ियां सड़कों के किनारे नजर आईं। खमतराई पुल से भनपुरी पुल तक बीच-बीच में चार-पांच के समूह में ट्रक मिले। भनुपरी तिराहे के पास हालात बेहद खराब थे। तिराहे पर पड़ने वाले पेट्रोल पंप के सामने खाली जगह पर 15 गाड़ियां नजर र्आई। भनपुरी से बिरगांव तिराहे तक सड़क के दोनों ओर गाड़ियों की कतारें थोड़ी-थोड़ी दूर पर दिखाई दी। इनकी संख्या 40 से ज्यादा थी। बिरगांव तिराहे से रावांभाठा तक 25 गाड़ियां सड़क किनारे खड़ी थीं।
इलाके में मुनादी कर ट्रक चालकों को ट्रांसपोर्टनगर में गाड़ी खड़ी करने के लिए राजी किया जा रहा है। समझाने से बात नहीं बनी तो गाड़ियां खींचने की कार्रवाई भी शुरू करेंगे।
-बीबीएस राजपूत, सीएसपी, उरला
कहीं टाटीबंध जैसा हश्र न हो
शहर में रावाभाठा समेत अब दो ट्रांसपोर्टनगर हो गए हैं। टाटीबंध के पुराने ट्रांसपोर्टनगर की हालत बदहाल है। 20 साल पुराने इस नगर में गाड़ियां भी खड़ी नहीं होती। गाड़ियों के लिए बनाए गए प्लेटफार्म गायब हो चुके हैं। मुख्यद्वार के दोनों ओर ट्रक, ट्रेलर, जेसीबी, और तिपहिया वाहनों की लंबी कतारें नजर र्आई। अंदर दलदल बना हुआ है। दुकानों के सामने पानी भरा हुआ है और चारों तरफ गंदगी फैली हुई है।
दुकानदारों ने बताया कि सालों से यहां सफाई कर्मचारी नहीं आए। मुख्यमार्ग की हालत भी दयनीय है। कंक्रीट की सड़क पर मुरम युक्त धूल की मोटी परत बिछी हुई है। गाड़ियों के गुजरते वक्त धूल का मोटा गुबार उड़कर दुकानों में जाता है। मुख्य मार्ग के अलावा बाकी सड़कें डब्ल्यूबीएम की हैं जो लगातार गाड़ियां गुजरने से जगह-जगह, एक-एक फीट तक धंस गई हैं। इन सड़कों पर गाड़ी चलाना मुश्किल हो जाता है।
लोगों ने बताया कि ट्रांसपोर्टनगर बनने के बाद से अब तक इन सड़कों पर डामर या कंक्रीट की परत नहीं चढ़ी। नालियों में कचरा और मिट्टी भर जाने से कई जगहो पर पानी जाम है। ये नालियां ट्रांसपोर्टनगर के अंतिम छोर से करीब 40 फीट पहले अधूरी छोड़ दी गई हैं। इन नालियों में जमा गंदे पानी में मच्छरों की फौज पलने के साथ कचरा सड़ने से बदबू फैल रही है।