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रापनि कर्मचारियों के लिए 10 करोड़ की राहत

बिलासपुर. हाईकोर्ट ने पूर्व राज्य परिवहन निगम के कर्मचारियों को राहत देते हुए राज्य शासन को आदेश दिया है कि उनके लिए राहत राशि के तौर पर 10 करोड़ रुपए जमा कराएं। यह राशि हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा कराई जाएगी। हाईकोर्ट के निर्देशानुसार इस राशि का वितरण रापनि कर्मचारियों को किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद यहां पर राज्य परिवहन निगम का गठन नहीं किया गया। निगम के भंग होने के बाद उसके कर्मचारियों को राज्य अधोसंरचना विकास निगम (सीआईडीसी) के अधीनस्थ कर दिया गया। इन कर्मचारियों को वर्ष 1988 से प्रभावी वेतनमान नहीं मिल रहा था, जिसके लिए उन्होंने कर्मचारी संगठनों के माध्यम से कई बार शासन और रापनि के वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन और आवेदन सौंपे। इसके बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर उन्होंने लेबर कोर्ट में मामला दायर कर दिया।

लेबर कोर्ट ने 1988 से अब तक 20 साल के वेतन के एवज में कर्मचारियों को 20 करोड़ रुपए भुगतान का आदेश किया। अधोसंरचना विकास निगम ने लेबर कोर्ट के इस आदेश को चुनौती देते हुए वकील विवेकरंजन तिवारी के माध्यम से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी। याचिका में सीआईडीसी ने कहा कि जिन कर्मचारियों को वेतन देने का आदेश लेबर कोर्ट ने किया है, वे उनके नहीं बल्कि रापनि के कर्मचारी हैं।

शासन के निर्देश पर सीआईडीसी ने उन्हें मर्ज किया था। उनको वेतन या अन्य तरह की क्षतिपूर्ति देने का दायित्व राज्य शासन का है। सीआईडीसी को वेतन देने का आदेश अवैध है।

सुनवाई के बाद जस्टिस सतीश अग्निहोत्री की सिंगल बेंच ने लेबर कोर्ट के आदेश पर रोक लगाते हुए शासन को निर्देश दिए कि रापनि कर्मचारियों के लिए राहत राशि के तौर पर 10 करोड़ रुपए हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास जमा कराएं। इससे उन्हें पूरा वेतन नहीं, लेकिन कुछ तो राहत मिलेगी। इस राहत राशि का वितरण हाईकोर्ट के निर्देशानुसार कर्मचारियों को किया जाएगा।





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