लखनऊ. बसपा प्रमुख मायावती को प्रधानमंत्री पद के लिए मिल रहे समर्थन के बीच राजनीतिक हलकों में उत्तरप्रदेश में मुख्यमंत्री पद के दावेदार को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। गौरतलब है कि मायावती ने पार्टी के किसी भी नेता को नंबर दो का दर्जा नहीं दिया है।
वामदलों के प्रयासों के नतीजे में यदि मायावती प्रधानमंत्री बनीं तो उत्तरप्रदेश में नेतृत्व का सवाल खड़ा हो सकता है। पार्टी में नंबर दो पर कोई नेता नहीं है और बसपा प्रमुख ने पूर्व में कहा था कि उनका उत्तराधिकारी कोई दलित ही होगा। मायावती के उस बयान के हिसाब से तो उनके भरोसे के नेता बसपा महासचिव एससी मिश्र तो नंबर दो की दौड़ से बाहर ही हैं।
दूसरी ओर, पार्टी में किसी दलित नेता का कद इतना ऊंचा है नहीं कि वह मायावती का उत्तराधिकारी बन सके। हालांकि पार्टी के नसीमुद्दीन, बाबू सिंह कुशवाह, स्वामी प्रसाद मौर्य, इंद्रजीत सरोज और राम अचल राजभर के नाम अग्रिम पंक्ति के नेताओं में आते हैं।हाथी को ताकतवर बनाने में जुटे हैं दो लाल : अमर सिंह
समाजवादी पार्टी के महासचिव अमर सिंह ने बसपा को ताकतवर बनाने के लिए भाजपा और वामदलों को आड़े हाथों लिया है। विदेश मंत्री के निवास पर यूपीए की बैठक के बाद सिंह ने कहा, ‘दो लाल (लालकृष्ण आडवाणी और वामदल) साथ मिलकर हाथी की ताकत बढ़ा रहे हैं।’
दरार नहीं : सपा के कुछ और सांसदों के बागी हो जाने के बावजूद सिंह ने दावा किया कि पार्टी में किसी तरह की कोई दरार नहीं है।
दलित सांसद दें मनमोहन को समर्थन : उदितराज
लखनऊ : इंडियन जस्टिस पार्टी ने सभी 119 दलित सांसदों से अपील कर कहा है कि परमाणु करार देश के हित में है, इसलिए उन्हें एकजुट होकर मनमोहन सरकार के समर्थन में वोट देना चाहिए। पार्टी अध्यक्ष उदितराज ने दलित सांसदों से कहा है कि उन्हें केंद्र की सत्ता में आने का ख्वाब देख रहीं मायावती के झांसे में नहीं आना चाहिए।