जयपुर.
सावन के पहले दिन शनिवार को सुबह से ही शहर के शिवालय हर हर महादेव, ओम नम: शिवाय और बमबम भोले के समवेत स्वरों से गूंज उठे। श्रद्धालुओं ने शिव का जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और सहस्रघट पूजन कर मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना की।
शिवालयों में श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए विशेष प्रबंध किए गए। झाड़खंड महादेव मंदिर, ताड़केश्वर महादेव मंदिर, चमत्कारेश्वर महादेव मंदिर, जंगलेश्वर, सदाशिव ज्योतिर्लिगेश्वर सहित शहर के सभी मंदिरों में जलाभिषेक के लिए रामझारों की भी व्यवस्था गई है।
झाड़खंड महादेव मंदिर : क्वींस रोड स्थित इस मंदिर में भोलेनाथ का जूही, मोगरा, गुलाब के फूलों से विशेष श्रंगार किया गया। मंदिर में सोमवार से श्रद्धालुओं के लिए करीब 600 रामझारों की व्यवस्था की जाएगी। विशेष कार्यक्रमों के तहत सावन के अंतिम सोमवार को यहां नौकाविहार झांकी सजाई जाएगी और भजन संध्या कार्यक्रम होगा।
सदाशिव ज्योतिर्लिग महादेव : कूकस स्थित नवधातु, नवरत्न और 1 से 14 मुखी रुद्राक्ष से अलंकृत सदाशिव ज्योर्तिलिंग महादेव मंदिर में बड़ी संख्या में भक्तों ने पूजा-अर्चना की। यहां श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया और शाम को विशेष झांकी सजाई गई। मंदिर में हरिद्वार, पुष्कर और गलताजी से पवित्र जल लेकर कावड़ यात्राएं पहुंची हैं।
ताड़केश्वर महादेव मंदिर : यहां सुबह से ही श्रद्धालुओं का आना शुरू हो गया था। भोलेनाथ का सहस्रघट अभिषेक किया गया। मंदिर में पहले सोमवार को रुद्र पाठ होंगे और फूल बंगला झांकी सजाई जाएगी। मंगलवार को दुग्धाभिषेक होगा। सावन के तीसरे व चौथे सोमवार को सवा लाख बिल्व पत्र अर्पित किए जाएंगे।
जंगलेश्वर महादेव मंदिर : बनीपार्क स्थित इस मंदिर में शिवशंकर का सुगंधित पुष्पों से आकर्षक श्रंगार किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भोलेनाथ का दुग्धाभिषेक किया। यहां सावन के प्रत्येक सोमवार को विशेष झांकी सजाई जाएगी।
चमत्कारेश्वर महादेव : झोटवाड़ा रोड स्थित इस मंदिर में सहस्रघट अभिषेक के बाद शिवजी को 1100 कमलपुष्प अर्पित किए गए। यहां सावन के पहले सोमवार को पीयूषजी महाराज के सान्निध्य में आयोजित होने वाले शिवमहापुराण के लिए कलशयात्रा निकाली जाएगी। इसके बाद रुद्राभिषेक और रुद्रपाठ होंगे। शाम को फूल बंगला झांकी सजाई जाएगी। भजन सत्संग का आयोजन होगा।
कब कहां होगा शिव का निवास
सावन में होने वाले व्रत अनुष्ठान, रुद्राभिषेक और सहस्रघट के लिए शिव का निवास देखना आवश्यक है। पंडित बंशीधर जयपुर पंचांग निर्माता पं. दामोदर प्रसाद शर्मा के अनुसार सावन में शिव का निवास देखकर ही अनुष्ठान का निर्धारण होता है। इसके लिए जो तिथि होती है, उसको 2 से गुणा कर 5 से जोड़ते हैं और 7 से भाग देते हैं। जो फल आए उसी स्थान पर शिव का वास निश्चित होता है।
इस बार 22, 28 जुलाई व 13 अगस्त को पहला शिव वास कैलाश में होगा। दूसरा 26 जुलाई व 1, 3,10 अगस्त को शिव वास गोरी पाश्र्व में होगा। तीसरा शिव वास 23, 29 जुलाई व 7, 14 अगस्त को बैल की सवारी पर होगा। चौथा शिव वास ज्ञान वेला में 24, 30 जुलाई व 8, 15 अगस्त को होगा। पहले सोमवार के दिन 21 जुलाई को शिव का वास सही नहीं रहेगा। जो दोपहर बाद शाम को 4:04 मिनट पर ही सही हो पाएगा।