जयपुर. पूर्व खाद्यमंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने विधानसभा अध्यक्ष को शनिवार को पुन: पत्र लिखकर इस्तीफा स्वीकार करने का आग्रह किया है। डॉ.मीणा ने पत्र में स्पष्ट किया है कि इस्तीफे में उन्होंने किसी तरह की शर्त नहीं रखी थी, अगर ऐसी कोई भी बात सामने आने पर वे राजनीतिक जीवन त्याग देंगे।
उन्होंने इस बात पर अफसोस जताया है कि विधानसभा अध्यक्ष ने उनके बारे में सदन में मानसिक अवसाद में होने की बात कहीं। अध्यक्ष का पद गरिमामय है। मेरे बारे में सदन में राय प्रकट करते समय अध्यक्ष पद की हैसियत का ख्याल रखा जाना चाहिए था।
इससे अध्यक्ष पद की गरिमा को ठेस पहुंची है। पत्र में कहा गया है कि मौखिक रूप से बताई या इस्तीफे में लिखी जानकारी सदन को दी जाती तो उस पर सार्थक बहस की संभावना थी। अगर ऐसा होता तो आरक्षण संबंधी तथ्य एवं अन्य प्रकरणों की वस्तुस्थिति का लोगों को पता चलता।
डॉ.मीणा ने लिखा है कि आरक्षण आंदोलन की असंवैधानिक मांग को लेकर राज्य में फैली अनियंत्रित हिंसा एवं सुप्रीम कोर्ट व हाईकोर्ट के आदेशों की अनुपालन नहीं किए जाने पर 14 जून को ही उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दे दिया था।
बाद में 16 जुलाई को विधानसभा भवन के कार्यालय में मुलाकात कर इस्तीफे की एक प्रति विस्तृत विवरण के साथ पुन: दी थी। उस समय आरक्षण आंदोलन की एक घटना पर विधानसभा अध्यक्ष ने भी अफसोस जताया था।