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ग्रहों की दशा, रत्नों की छलांग

जयपुर. ratna धन प्राप्ति, कॅरियर में सफलता, मानसिक व ग्रह शांति और राजनीति में ऊंची छलांग के लिए लोग इन दिनों रत्नों का सहारा ले रहे हैं। विदेशियों में ज्योतिष के प्रति बढ़ती आस्था उन्हें रत्नों को धारण करने के प्रति आकर्षित कर रही है। राशि तथा ग्रहों के आधार पर रत्न धारण करने के रुझान ने इन दिनों रत्न व्यवसाय को पंख लगा दिए हैं। निर्यात के साथ-साथ रत्नों के स्थानीय कारोबार भी इन दिनों चमक पर है।

दुनिया में रंगीन रत्नों की मंडी के रूप में मशहूर गुलाबी नगरी में पिछले एक साल में रत्नों का कारोबार 120 करोड़ रुपए बढ़ गया। साल-दर-साल रंगीन रत्न (कलर स्टोन) के प्रति लोगों के रुझान को देखते हुए रत्न व्यवसायियों के चेहरे खिले हुए हैं। जहां शेयर बाजार, रीयल एस्टेट और दूसरे अन्य काम धंधे इन दिनों मंदे पड़े हैं, वहीं इस व्यवसाय से जुड़े लोगों के चेहरे खिले हुए हैं।

रत्न खरीदने के लिए दुनियाभर से लोग यहां आने लगे हैं। शौकिया तौर पर रत्न पहनने और ग्रहों के आधार पर इन्हें धारण करने वालों की संख्या भी दिनोंदिन बढ़ रही है। रत्न व्यवसायियों का कहना है कि रंगीन रत्न के प्रति लोगों का रुझान बढ़ता जा रहा है। दुनिया में रंगीन रत्नों के मामले में जयपुर प्रसिद्ध है। हर साल बाहर से आने वाले खरीदारों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है।

कहां होता है निर्यात : विश्व में 100 से अधिक कलर स्टोन मिलते हैं। इनमें भी आम आदमी नवरत्नों की खरीद ज्यादा करता है। आजकल विदेशियों का भी ज्योतिष के प्रति रुझान बढ़ रहा है। जयपुर में अमेरिका, बैंकाक, यूरोप और हांगकांग के खरीदार ज्यादा आते हैं। अफ्रीका और ब्राजील से रत्नों का आयात किया जाता है।

जमीन मिलने का इंतजार : टाटीवाला ज्वैल्स एंड जेम्स के संचालक राजीव टाटीवाला ने बताया कि जेम्स एंड ज्वैलरी बोर्स के लिए सरकार ने टोंक रोड पर दुर्गापुरा के नजदीक 15 हजार वर्गमीटर जमीन चिन्हित कर रखी है, लेकिन अभी उन्हें आवंटित नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि अगर यह जमीन आवंटित हो जाए तो रत्न कारोबार और तेजी से बढ़ सकता है।

इसके बाद खरीदारों को सभी प्रकार के जेम्स व ज्वैलरी से संबधित आइटम एक ही जगह मिल सकेंगे। मोती, पुखराज, नीलम व मूंगा की सर्वाधिक मांग : ज्योतिषियों के अनुसार लोग मनोकामना पूर्ति, जीवन में प्रगति और ग्रहों के दोष निवारण के लिए रत्नों को धारण करते हैं। आजकल लोग मानसिक शांति, धनार्जन, विद्यार्जन और राजनीतिक उन्नति के लिए रत्न धारण करते हैं। पं. बंशीधर जयपुर पंचांग के पं. दामोदर प्रसाद शर्मा का कहना है कि लोग मूंगा, मोती, पुखराज और नीलम पहनने में ज्यादा रुचि रखते हैं।

जयपुर ज्वैलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विवेक काला ने कहा कि जयपुर पहले रंगीन पन्ने की मंडी के रूप में प्रसिद्ध था। पिछले 25 सालों में यह रंगीन रत्नों की मंडी बन गया और अब यह रत्न आभूषण की मंडी बनने की दिशा में अग्रसर है। वर्तमान में राज्य में लगभग 1112 करोड़ का रत्न व्यवसाय होता है। वर्तमान खरीदारी और इस व्यवसाय के प्रति लोगों के रुझान को देखते हुए यह आने वाले सालों में 1500 करोड़ तक पहुंचने की संभावना है।





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