अजमेर. श्रीनगर थाना इलाके में शनिवार को फारकिया गांव के पास पानी से भरे गड्ढे में नहाते समय डूबने से चार बच्चों की मौत हो गई, जबकि एक बच्ची बच गई। चारों कीचड़ में फंस गए थे। हादसे से गांव में मातम और गुस्सा व्याप्त हो गया। लोगों ने गड्ढे बंद करने की मांग को लेकर दो घंटे तक रास्ता जाम रखा।
फारकिया गांव से करीब दो किलोमीटर दूर बाबाजी की बगीची के पास पिछले दिनों सड़क निर्माण के दौरान गbा बन गया था, जिसमें बरसात से इसमें पानी भर गया। शनिवार को भेड़-बकरियां चरा रहे शौकीन (12) पुत्र रतनसिंह, बीरी (11) पुत्री मानसिंह, कांता (8) पुत्री शैतानसिंह रावत, नीतू (12) पुत्री पप्पूसिंह गड्ढे में नहा रहे थे। .इस बीच, गांव की एक स्कूली छात्रा माया (12) पुत्री मोडसिंह भी पहुंच गई।
माया कम गहरे पानी में थी, जबकि अन्य बच्चे गहरे पानी में उछलकूद कर रहे थे। कीचड़ में फंसने से शौकीन, बीरी, कांता और नीतू डूब गए। उधर माया घबराकर बाहर निकल आई। उसने बाहर मौजूद दो लड़कियों के साथ कुछ दूरी पर काम कर रहे नरेगा श्रमिकों को घटना की जानकारी दी। लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी।
गुस्साए लोगों ने श्रीनगर बाइपास मार्ग जाम कर दिया। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और लोगों को समझा कर शांत किया। एक साथ चार बच्चों की मौत से फारकिया गांव में मातम छा गया।
बचाने की कोशिश में डूबे
श्रीनगर/किशनगढ़. फारकिया गांव के पास शनिवार को हादसे का शिकार हुए चारों बच्चों ने एक-दूसरे को बचाने की कोशिश की थी। हादसे में बची किशोरी माया का कहना है कि शौकिन, बिरी, कांता, व नीतू कीचड़ में फंस गए थे। ये सभी एक-दूसरे को बचाने की कोशिश में डूब गए, जबकि कम पानी में होने के कारण माया बाहर निकल गई। माया ने बताया कि वह स्कूल से घर गई थी, खाना खाने के बाद वह खेलने के लिए गbे के पास पहुंच गई थी, जहां पहले से ही चारों बच्चे नहा रहे थे।
गुस्सा और मातम : हादसे में बची माया की सूचना पर नरेगा श्रमिक दौड़ते हुए घटनास्थल पर पहुंचे, चारों बच्चों को पानी से निकालकर अस्पताल में पहुंचाया गया। जहां डाक्टरों ने चारों को मृत घोषित कर दिया। गुस्साए ग्रामीणों ने हाइवे जाम कर दिया। ग्रामीणों की मांग थी कि गड्ढे बंद किया जाए और मृतकों के परिवारजन को आर्थिक सहायता दी जाए। एसडीएम सुरेश सिंधी, डीएसपी योगेन्द्र फौजदार ने ग्रामीणों को समझाया। उधर मृत बच्चों के परिवारजन के विलाप से माहौल गमगीन हो गया। गांव के घरों में शाम को चूल्हे नहीं जले।