Manoranjan
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Bollywood Bollywood मेरा अध्यात्म
मैं दो धर्मो से ताल्लुक रखती हूं। इसलिए बचपन से मुझे सर्वधर्म समभाव के साथ जीना सिखाया गया है। मेरी मां अफगानी हैं, जबकि पिता हिंदुस्तानी (पंजाब) हैं। मेरी पैदाइश काबुल की है पर मेरा पालन-पोषण हिंदुस्तान के कई सीमांत इलाकों और शहरों में हुआ है। मेरे पिता कर्नल जेटली फौज में थे। अब वे रिटायर हैं। मेरी परवरिश से ही आप मेरी मानसिक सोच और विचारों का अंदाजा लगा सकते हैं।
मैं सभी धर्म, सही मजहबों का तहेदिल से सम्मान करती हूं। ऊपर वाले में मेरी पूरी आस्था है। साथ ही एक फौजी की बेटी होने के नाते कड़ी मेहनत और संघर्ष में भी मेरा यकीन बहुत गहरा है। लेकिन मैं ऐसा भी नहीं मानती कि भगवान मेरे लिए सबकुछ अच्छा कर देंगे। इसके लिए मुझे भी कुछ मेहनत करनी होगी, अपने हाथ-पांव चलाने होंगे। ईश्वर ने यह शरीर आखिर दिया ही क्यों है?
बिना दिया जलाए मैं कभी घर से बाहर नहीं निकलती। सुबह-शाम पूजा करती हूं। मेरे घर के मंदिर में सभी देवी-देवताओं की तस्वीरें लगी हुई हैं। वहां क्राइस्ट भी हैं और राम भी। अन्य धर्मो के प्रतीक चिन्ह भी वहां हैं। हां, देवियों की तस्वीरें ज्यादा हो सकती हैं, क्योंकि देवी और उनके कई रूपों की जानकारी के साथ मैं उनकी तस्वीरें रखती हूं। संतोषी माता में मेरी अपार श्रद्घा है। सरस्वती तो कला की देवी हैं। उनकी मैं विशेष पूजा करती हूं। पूजा बहुत उर्जा देती है। दिमाग को सुकून पहुंचाती है।
आत्मविश्वास बढ़ता है और नेकी पर चलने का भरोसा भी मिलता है। मेरे हिसाब से आपका शरीर स्वस्थ और मन साफ रहे तो आपको किसी खास आध्यात्मिक अभ्यास की जरूरत नहीं होनी चाहिए। मन चंगा तो कठौती में गंगा वाली बात है। मन की शांति के लिए मैं अपने परिवार के साथ रहना ज्यादा पसंद करती हूं। डिस्को, पार्टी या नाइट क्लबों में नहीं जाती। फिल्म इंडस्ट्री और ग्लैमर से जुड़ी लड़की का ऐसा होना कई लोगों को विचित्र और उबाऊ भी लग सकता है। लेकिन घर में मुझे क्या खुशी मिलती है, यह कोई कैसे जान सकता है? मेरा मन किन चीजों में रमता है, यह तो मैं ही बेहतर समझती हूं। मैं गिटार बजाती हूं, महादेवी वर्मा की कविताएं पढ़ती हूं।
आर्चीज की नटखट कहानियां भी कभी-कभी पढ़ लेती हूं। गिटार बजाते हुए मैं योग की अवस्था में आ जाती हूं। जैसाकि मैंने पहले भी कहा कि शरीर स्वस्थ रहे तो मन की शांति या आध्यात्मिक शक्ति के लिए कुछ विशेष करने की जरूरत नहीं तो अपनी फिटनेस को लेकर भी मैं काफी सजग रहती हूं। रोजाना एक घंटे योग करती हूं। अनुष्ठान योग मेरा पसंदीदा है। यह मुझे काफी रिलैक्स कर देता है। बाकी मैं अपने काम को मन लगाकर करती हूं और उसी में आनंदित होती हूं। कुल मिलाकर मैं कह सकती हूं कि मैं एक स्वस्थ और संतुलित जीवन जी रही हूं।
(सुनील कुकरेती से बातचीत पर आधारित)