जोधपुर.
बेलगाम खर्च ने नगर विकास न्यास को कंगाल बना दिया है। कमाई पर किसी तरह का ध्यान नहीं देने से न्यास की हालत यह है कि खजाने में महज छह करोड़ रुपए ही बचे हैं। जबकि उसके सिर पर करीब डेढ़ सौ करोड़ की देनदारियों की तलवार लटक रही है। अब तो छोटा-मोटा खर्च चलाने तक के लिए रोज कमाओ-खाओ जैसी नौबत आ गई है।
इस महीने की शुरुआत में न्यास के खातों में करीब 13 करोड़ रुपए थे। देनदारियों का बोझ बढ़ने से कई प्लॉट नीलाम करने के बावजूद मजबूरन सात करोड़ रुपए का भुगतान करना पड़ गया। छह करोड़ के आंकड़े को पचास करोड़ तक पहुंचाने के लिए न्यास के अफसरों के पास ख्याली-पुलाव के सिवाय किसी तरह की ठोस योजना नहीं है।
न्यास के लेखाधिकारी निहालसिंह का कहना है कि यदि हाउसिंग बोर्ड को न्यास की भूमि हस्तांतरित होती है तो करीब तीस से पैंतीस करोड़ रुपए मिलने की संभावना है। उन्होंने कहा कि रामराज नगर के प्लॉट की लॉटरी निकलने से आठ करोड़ रुपए आ जाएंगे। कमोबेश इतनी ही राशि दत्तोपंत ठेंगड़ी नगर से आने की उम्मीद है।
प्लॉटों की नीलामी से भी आय हो रही है। इनके अलावा अन्य योजनाओं पर भी काम हो रहा है। यह पूछे जाने पर कि इतनी राशि आ भी जाए तो क्या पाली व पाल रोड जैसे बड़े प्रोजेक्ट के अलावा अन्य विभागों की मांगों एवं न्यास के करोड़ों के वर्कऑर्डर का भुगतान संभव हो सकेगा? लेखाधिकारी भी मानते हैं कि यह आय त्नऊंट के मुंह में जीरात्न ही साबित होगी।
चुनावी वर्ष में प्रशासनिक दबाव
दरअसल, चुनावी साल में कार्यकत्र्ताओं के कामों के अलावा अन्य विभागों से डिपोजिट काम करवाने का इतना प्रशासनिक दबाव है कि न्यास के अफसरों को बेमन से टेंडर और वर्कऑर्डर जारी करने पड़ रहे हैं। जिन कामों से न्यास का कोई लेना-देना नहीं है, उसके लिए भी न्यास के खजाने का भरपूर दोहन किया जाता रहा है। कुछ नए प्रोजेक्ट हाथ में लेने का भी दबाव बना हुआ है, लेकिन यह कोई नहीं जानता कि काम करवाने की सूरत में भुगतान कैसे होगा?
स्थितियां पूर्ववर्ती कांग्रेस शासन के आखिरी साल की तरह हो चुकी हैं, जब न्यास पर 10 करोड़ से ज्यादा की देनदारियां थीं। अफसर मानते हैं कि यदि ऐसे ही हालात रहे तो प्रस्तावित आय से हरसंभव भुगतान करने के बाद भी इस साल देनदारियां पचास करोड़ से ज्यादा ही होंगी। चौंकाने वाला पहलू यह है कि न्यास ने हाल ही एक बैंक के दो चेक तो काट दिए, मगर पैसा नहीं होने से वे अनादरित हो गए।
माली हालत खस्ता, नए प्रोजेक्ट का दबाव
न्यास की माली हालत भले ही खस्ता हो चुकी हो, लेकिन उस पर अब तक नए काम शुरू करने का दबाव बना हुआ है। कायलाना प्रोजेक्ट पर उदासीन रहा न्यास बोर्ड अब 5 करोड़ रुपए की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजने जा रहा है।
जिला प्रशासन बाईजी का तालाब व रावण का चबूतरा में इनडोर स्टेडियम का काम शुरू करने के लिए औपचारिकताएं शुरू करने का दबाव बनाए हुए है। यदि इन कार्यो को हाथ में लिया जाता है तो पांच से सात करोड़ रुपए के दायित्व और बढ़ जाएंगे। वैसे भी जोधपुर विकास प्राधिकरण का गठन करने के लिए राज्य सरकार न्यास को एक करोड़ रुपए रिजर्व रखने के लिए कह चुकी है।
उम्मीदों पर पानी फिरा
न्यास को विवेक विहार योजना में सर्वाधिक कमाई हो सकती थी, लेकिन इस योजना को अमली जामा पहनाने की कोशिशें कागजी ही साबित हुईं। नतीजतन, न्यास करोड़ों रुपए की आय से महरूम रह गया। विजयाराजे नगर में होटल के प्लॉट की नीलामी में कोई खरीदार नहीं मिला। इससे पहले चौखा में आवासीय और कॉमर्शियल भूखंडों की नीलामी में मौके पर अतिक्रमण होने से खरीदारों ने मानस बदल दिया। खुद कलेक्टर रोजाना की नीलामी पर नजर रखे हुए हैं। हालत यह है कि जितनी आय होती है, उससे चार गुणा राशि की मांग खड़ी हो जाती है।
मासिक खर्च 75 लाख
न्यास के कर्मचारियों के वेतन-भत्तों के अलावा कार्यालय के सामान्य कामकाज पर होने वाला मासिक व्यय 75 लाख रुपए से ज्यादा है। इसके अलावा फिजूलखर्ची भी बेहिसाब है। विकास योजनाओं का सुनियोजित रोडमैप नहीं होने से करोड़ों रुपए फिजूल खर्च किए जा चुके हैं। ऐसे एक नहीं अनेक उदाहरण हैं।
रामराज नगर में पिछले नक्शे के आधार पर कच्ची सड़कें बनाने पर 15 लाख रुपए पानी में बहा दिए गए। बड़ली में मिल्कमैन कॉलोनी का बुनियादी ढांचा खड़ा करने में एक करोड़ रुपए फूंक दिए, लेकिन कॉलोनी नहीं बसी। गौरव पथ पर साख बचाने के लिए एक ही सड़क पर कई बार डामर बिछाया जाता रहा।
न्यास अध्यक्ष गहलोत से बातचीत
भास्कर: न्यास कंगाली की हालत में पहुंच गया है, ऐसी नौबत क्यों आई?
गहलोत: प्रोजेक्ट चल रहे हैं। शहर में पैसा लगा रहे हैं तो खर्च होगा ही। कमाई भी कर रहे हैं। कोई दिक्कत नहीं आने देंगे।
भास्कर: डेढ़ सौ करोड़ की देनदारियां नजर आ रही हैं, आखिर कैसे करोगे व्यवस्था?
गहलोत: इससे किसी को क्या लेना-देना। किसी को टेंशन लेने की जरूरत नहीं। प्लॉट नीलाम कर रहे हैं, स्कीमें बन रही हैं। सब ठीक हो जाएगा।
कैसे होगा इन्हें भुगतान
पाल व पाली रोड: इन दो सड़कों को चौड़ा करने का काम प्रगति पर है। 88 करोड़ से भी ज्यादा के इस प्रोजेक्ट पर न्यास को अब भी कम से कम पचास करोड़ रुपए आरएसआरडीसी को भुगतान करने हैं।
बनाड़ रोड: इस काम के लिए पीडब्ल्यूडी को 8 करोड़ का भुगतान करना है।
एम्स के लिए बिजली तंत्र: एम्स के लिए भूमिगत बिजली तंत्र बिछाने के लिए न्यास को दो करोड़ रुपए देने के लिए बाध्य किया जा रहा है।
अन्य सड़कें: बालसमंद व किला रोड सहित अन्य सड़कों के डिपोजिट काम पर भी करीब एक करोड़ से ज्यादा का भुगतान किया जाना है।
चिकित्सा विस्तार के काम: एमडीएम
अस्पताल में निर्माणाधीन इकाई विस्तार इमारत पर भी लागत के अनुसार तीन करोड़ रुपए से ज्यादा न्यास को देने होंगे।
निगम का हिस्सा: पिछले साल भूमि विक्रय से हुई आय को देखते हुए न्यास से निगम करीब13 करोड़ रुपए अपना हिस्सा मांग रहा है। इसमें पूर्ववर्ती सालों की बकाया राशि शामिल नहीं है। इतनी ही राशि राज कोष में जमा करवानी होगी।
एडीबी का कर्ज: न्यास पिछले लंबे अरसे से एडीबी का कर्ज नहीं चुका रहा। यह राशि करीब साढ़े 11 करोड़ रुपए है।
न्यास स्तर के काम: न्यास अब तक जितने कार्यो के वर्कऑर्डर जारी कर चुका है, उसे देखते हुए भी आने वाले समय में करीब 35 से 40 करोड़ रुपए के दायित्व खड़े होने का अनुमान है।