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11वीं में छात्रों का टोटा सब जा रहे हैं कोटा

उदयपुर. लेकसिटी के प्रमुख स्कूलों में ग्यारहवीं कक्षा के छात्रों का टोटा पड़ रहा है क्योंकि ज्यादातर छात्र-छात्राएं आईआईटी की तैयारी करने कोटा जा रहे हैं। पब्लिक स्कूल प्रबंधकों के लिए ग्यारहवीं कक्षा में छात्रों की कमी चिंता का विषय बन गई है।

वे प्रतिभावान छात्रों को रोकने की योजना बनाने लगे हैं। आईआईटी में प्रवेश पाने की दीवानगी इस हद तक पहुंच चुकी है कि दसवीं पास करते ही उनका फोकस कोटा में कोचिंग का हो जाता है। अभिभावकों की चाहत भी कुछ ऐसी ही है।

लेकसिटी से कोटा जाने वाले विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस साल से आईआईटी प्रवेश के लिए परीक्षा में बैठने की संख्या सीमित करने के बाद विद्यार्थी बिल्कुल भी रिस्क नहीं लेना चाहते। जो बच्चे कोटा नहीं जा रहे, वे भी ऐसे स्कूलों में एडमिशन ले रहे हैं जहां 11वीं की बजाय पढ़ाई का फोकस इंजीनियरिंग एंट्रेस पर है।

इधर, होनहार विद्यार्थियों के स्कूल छोड़ने, कोचिंग के लिए अन्यत्र जाने की कवायदों को देखते हुए स्कूल प्रबंधन भी योजना बनाने में लगे हैं। सेंट पॉल्स, सेंट ग्रिगोरियस, महाराणा मेवाड़ पब्लिक स्कूल, सेंट्रल एकेडमी, आलोक सहित शहर के अधिकांश सीबीएसई स्कूलों में दसवीं पास करने वाले काफी विद्यार्थियों ने अपना स्कूल छोड़ा है। जिन स्कूलों में आईआईटी कोचिंग को लेकर अलग बैच बनाए गए हैं, वहां न्यू एडमिशन की संख्या ज्यादा है।

क्रीम स्टूडेंट्स का पलायन
सेंट्रल अकेडमी, सरदारपुरा स्कूल की प्रिंसीपल प्रिया बोस मानती हैं कि स्कूल में रेग्यूलर स्टॉफ, नियमित पढ़ाई और कई वर्षे से शानदार परिणामों के बावजूद विद्यार्थी पलायन कर रहे हैं। जिन बच्चों को केजी से पढ़ाया हो, उन्हें दसवीं में इंटरनल मार्किग में पूरा सपोर्ट करते हैं ताकि वे मेरिट में नहीं पिछड़े। ऐसे क्रीम बच्चे स्कूल छोड़े तो दुख होना स्वाभाविक है। सेंट पॉल्स स्कूल के प्रिंसीपल फादर थॉमस रेमिजियस ने लेकसिटी में इस बदले हुए ट्रेंड को स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि सेंट पॉल्स से भी करीब 20 छात्रों ने टीसी ली है, ताकि वे अन्यत्र रहकर आईआईटी कोचिंग कर सके।

स्कूल टाइमिंग कम करेंगे
सेंट ग्रिगोरियस स्कूल के प्राचार्य राजन सकरिया के अनुसार बच्चों को अधिक समय प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी में देने की खातिर हम स्कूल टाइमिंग कम करने पर विचार कर रहे हैं। ग्रिगोरियस से 11 वीं में करीब 15 विद्यार्थियों ने टीसी ली है। आलोक स्कूल के निदेशक डा. प्रदीप कुमावत के अनुसार स्कूल से करीब 25 विद्यार्थियों ने टीसी ली है, लेकिन नए एडमीशन ने कई सालों का रिकार्ड तोड़ा है।

कोचिंग सफलता की गारंटी नहीं
सेंट एंथोनीज के प्रिंसीपल विलियम डिसूजा के अनुसार किसी स्कूल से पांच-दस बच्चों का एक साथ टीसी लेना दर्शाता है कि पूरा ग्रुप एक दूसरे को देखकर प्रभावित हुआ है। लंबे समय तक यह प्रभाव कायम नहीं रह पाता। एमएमपीएस के प्राचार्य प्रशांत वशिष्ट के अनुसार पुराने विद्यार्थियों की संख्या में खास गिरावट नहीं आई है। दूसरी ओर सीपीएस के वाइस प्रिंसीपल सुनील बाबेल ने बताया कि स्कूल में ही विशेषज्ञों की सेवाएं ली जा रही है।

केवल आईआईटी बैच में 70 स्टूडेंट्स
दी स्टडी सीनियर सैकंडरी स्कूल में इस बार सर्वाधिक एडमीशन ग्यारहवीं क्लास साइंस फेकल्टी में हुए हैं। साइंस विद्यार्थियों की संख्या 125 है जिसमें केवल 25 पुराने विद्यार्थ्ी हैं। सौ स्टूडेंस शहर के अन्य पब्लिक स्कूलों से पहुंचे हैं। कोर्डिनेटर मुकेश श्रीमाली ने बताया कि साइंस में तीन बैच बनाए गए हैं जिनके नाम-होप, एंबीशन और गोल है। त्नहोपत्नवाला बैच केवल आईआईटी फोक्सड स्टूडेंटस के लिए है जिसमें 70 विद्यार्थी हैं।

स्कूल छोड़ने की मुख्य वजह
>> कोचिंग हब कोटा से पढ़ाई करने पर सफलता के ज्यादा चांस होने का विश्वास
>> स्कूलों में सीबीएसई कुरिकुलम पर ध्यान, प्रतियोगी परीक्षा फोकस्ड नहीं पढ़ाई
>> पांच-छह घंटे लंबी स्कूल टाइमिंग से नहीं मिलेगा एंट्रेंस तैयारी को पर्याप्त समय
>> आईआईआईटी प्रवेश परीक्षा में बैठने के दो ही चांस, नहीं लेना चाहते रिस्क
>> आईआईटी में कोटा का परिणाम रहा इस साल शानदार





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