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शाहरुख बनाम सलमान : छवियों का छायायुद्ध

परदे के पीछेसुर्खियों में है कि कैटरीना कैफ के जन्मदिन की दावत में शाहरुख खान और सलमान खान के बीच वाद-विवाद हुआ और आमिर खान ने क्रोध के ज्वालामुखी फटने से पहले ही सुलह करा दी। सुलह के बावजूद दोनों पक्षों के हृदय में ज्वाला धधकती रहेगी, परंतु कोई किसी को हानि पहुंचाने की स्थिति में नहीं है। हर तरह के युद्ध की अग्नि विजेता और पराजित को एकसा नुकसान पहुंचाती है ओर दोनों ही झुलसते हैं, किसी की बांह तो किसी का हाथ।

बहरहाल इन खान सितारों की टक्कर के भीतरी कारण उन तीनों के अतिरिक्त किसी को नहीं मालूम, परंतु मीडिया अपनी पसंद-नापसंद के अनुरूप काल्पनिक संस्करण परोसता रहेगा। इस तरह परदे के परे एक तमाशा कुछ समय तक चलता रहेगा। फुर्सतिया लोग मजे लेते रहेंगे, क्योंकि उनके मनोरंजन की परिभाषा में मूर्तिभंजन और परनिंदा आवश्यक एवं अनिवार्य तत्व है।

किसी दौर में राज कपूर और दिलीप कुमार के बीच कड़ी प्रतिद्वंद्विता थी और आज के आमिर की तरह उस दौर में देव आनंद बीच-बचाव की तीसरी ताकत की तरह रहे। उस दौर में सार्वजनिक स्थानों पर कोई व्यक्तिगत अभद्रता का प्रदर्शन नहीं किया जाता था। इसी तरह धर्म्ेद्र और राजेंद्र कुमार भी प्रतिद्वंद्वी थे तथा मनोज कुमार निष्पक्ष रहे। अमिताभ बच्चन, विनोद खन्ना और धर्म्ेद्र भी गहरे प्रतिद्वंद्वी रहे। राजेश खन्ना आक्रोश की मुद्रा की आंधी में कहां जा फिके, आज तक उनकी खबर नहीं आई। बहरहाल, हर व्यवसाय में प्रतिद्वंद्विता हमेशा रही है- धीरुभाई अंबानी और वाडिया का युद्ध भी कुछ समय चला। बिड़ला और टाटा भी प्रतिद्वंद्वी रहे हैं, मीर और गालिब भी इससे बचे नहीं।

शाहरुख पढ़े-लिखे शतरंज के खिलाड़ी हैं और हमेशा महत्वाकांक्षा के घोड़े पर सवार रहते हैं। लंबे समय से सफलता प्राप्त करने वाले व्यक्ति को सफलता की आदत पड़ जाती है और थोड़ी सी असफलता भी सहने की क्षमता उसके पास नहीं होती। तमाम सितारे अपनी सफलता के संसार में सिमटे रहने वाले लोग होते हैं और यथार्थ की एक नजर से शीशे की तरह तड़क जाते हैं। हाल ही में ‘क्रिकेट’ में विफलता, ‘पांचवीं पास’ में विफलता और अमर सिंह का फिर से लाइम लाइट में प्रभावी होने का अंदेशा मात्र किंग खान को विचलित कर सकता है।

हमेशा महाराजा की तरह महसूस करते रहना आपको असहिष्णु बना सकता है। शाहरुख की सबसे बड़ी शक्ति और सबसे बड़ी कमजोरी उसकी बुद्धि अर्थात अक्ल है। ‘अदम’ का एक शेर है- ‘अक्ल हर चीज को इक जुर्म बना देती है। बेसबब सोचना, बे-सूद पशीमां होना।’

सलमान की जीवनशैली और विचार प्रक्रिया दिल द्वारा शासित रहती है और न वह शतरंज खेल सकते हैं, न ही ब्रिज खेल सकते हैं, जिसमें कन्वेंशन(परंपराएं) का आधार होता है। वह खून बहते तो देख सकते हैं, परंतु आंसू बहते नहीं देख सकते। उन्होंने अपने भीतर के शिशु को हमेशा अक्षुण्ण रखा है और बाल-सुलभ कौतुकता उनके स्वभाव का हिस्सा है। आमिर खान दिल और दिमाग के बीच संतुलन बनाते हैं और संतुलन ही उनके व्यक्तित्व के गुहा-द्वार का ‘खुल जा सिम सिम’ रहा है। उनके व्यक्तित्व की तरह उनके सिनेमा में भी व्यावसायिकता के साथ कला तत्व गुंथे होते हैं। आमिर शाहरुख के अहंकार और सलमान की मासूमियत के बीच की चीज है।

संजय लीला भंसाली की ‘हम दिल दे चुके सनम’ की शूटिंग के दौरान सलमान और ऐश्वर्या के अंतरंगता आई और अफवाह यह भी रही कि ‘देवदास’ के समय कुछ वैसी ही बात पारो और देवा के बीच रही। यह भी कहा जाता है कि सलमान ने शाहरुख की पत्नी को आश्वस्त किया था कि पारो और देवदास भी कभी मिले हैं! जिन्हें शरत नहीं मिला पाए, उन्हें भला भंसाली कैसे मिलाते।

दरअसल आज पारो किसी और की पत्नी है और उसे किसी विवाद में नहीं खींचा जाना चाहिए- यही सलमान की इच्छा भी है। प्रेम-प्रकरणों को कभी ट्राफीज की तरह अपने दीवानखाने में सजावट की तरह नहीं रखना चाहिए। वे हल्का वार्तालाप सुनकर भी तड़क सकती हैं। उस रात सलमान ने एक प्रस्ताव रखा था कि तीनों खान सितारों को एक साथ लेकर फिल्म तो नहीं बन सकती, परंतु देश-विदेश के चुनिंदा शहरों में स्टेज पर कार्यक्रम देकर करोड़ों रुपए राष्ट्र की भलाई के लिए इकट्ठा किया जा सकता है। दर्शक के अपार प्यार के लिए इससे बेहतर शुकराना और क्या हो सकता था। अनावश्यक और अकारण युद्ध में यह सार्थक विचार भी शहीद हो गया।





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आपके विचार
jdkha
Monday, 21st Jul 2008, 14:56
en teeno khan badshaho ke bare me galat tippani nahi karni chahia kyoki ye hindustan ke film badshah hai
rahul
Monday, 21st Jul 2008, 14:59
khan hindustan ki tarakki ki khaan hai
nishant agrawal
Monday, 21st Jul 2008, 17:44
u r a fantastic writer and im an addict to read u.most of ur views are transparent.but by the time SRK made the spoof of the critics in the filmfare ur attitude suddenly changed. wasnt that only for the sake of entertainment .that wasnt his words but the scripts he got.im not a die hard fan of shahrukh but has a deep respect for ur writing through which i get to know various fundas and secrets of the life.that should be induced from ur personal grudges.im very week in expressing the feeling so dont take it otherwise its just wat i felt like. nishant...