मुंबई.
अब आपको भी ऊंची ब्याज दरों के साथ जीना सीख लेना चाहिए। जी हां, मुद्रास्फीति जल्द नीचे उतरने वाली नहीं है। महंगाई की दर जैसे ही बढ़ती है वैसे ही लोगों की परेशानियां भी बढ़नी शुरू हो जाती हैं। बैंकों से मिलने वाला लोन महंगा हो जाता है और फिक्स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दर घटती चली जाती है।
महंगाई की मार गरीब-अमीर नहीं देखती, सब पर एक ही हंटर चलता है। इस हंटर की चोट का कम असर हो इसके लिए जरूरी है कि आप अपनी पूंजी को ऐसी जगह निवेश करें जहां यह महंगाई से महफूज रह सके यानि ऊंची मुद्रास्फीति में भी आपको मुनाफा मिलता रहे। अगर आप सालाना 4 लाख रुपए कमाते हैं तो हम आपको बैंक के फिक्स्ड डिपॉजिट में अपनी पूंजी रखने की सलाह नहीं देंगे। आपका टैक्स स्लैब जितना लंबा होगा उतनी ही ज्यादा आपको परेशानी होगी। अगर आप 5-6 लाख रुपए सालाना कमाते हैं तो बैंक के फिक्स्ड डिपॉजिट पर 34 प्रतिशत की ऊंची दर से आपको टैक्स देना होगा। इसलिए ऐसे निवेश ऑप्शन का चयन जरूरी हो जाता है जिस पर आपको कम टैक्स देना पड़े। ऐसा ही एक विकल्प है फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान (एफएमपी)। एफएमपी में आपको निवेश रकम पर फिक्स्ड डिपॉजिट के मुकाबले कम दर पर टैक्स देना होता है जबकि रिटर्न एफडी के बराबर ही मिलता है।
क्या है एफएमपी
फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान तय अवधि वाले क्लोज-एंडेड म्यूचुअल फंड होते हैं। एफएमपी डेब्ट इंस्ट्रूमेंट जैसे डिपॉजिट के सर्टिफिकेट, कॉमर्शियल पेपर व कॉपरेरेट डिबेंचर्स आदि में निवेश करते हैं। एफएमपी द्वारा निवेश की अवधि एक महीने से लेकर तीन साल तक हो सकती है। एफएमपी क्रेडिट योग्य साधनों (क्रेडिट वर्दी इंस्ट्रूमेंट) में निवेश करते हैं जिस कारण निवेशकों के लिए यह काफी फायदेमंद साबित होते हैं।
जोखिम ज्यादा
एफएमपी में निवेश से पहले याद रखें कि बैंक के फिक्स्ड डिपॉजिट के मुकाबले यह ज्यादा जोखिम भरे होते हैं। क्लोज-एंडेड होने के नाते निवेशक को एफएमपी में निवेश करने के वक्त ही पता चल जाता है कि मैच्योरिटी के वक्त उन्हें लगभग कितना रिटर्न मिलेगा।
अगर कोई निवेशक मैच्योरिटी की तारीख से पहले ही अपनी रकम निकालना चाहता है तो उसकी रकम पर 2 प्रतिशत की दर से एग्जिट लोड देय होता है।
इन पर रखें ध्यान
एफएमपी में निवेश से पहले कुछ पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। एक तो हमेशा याद रखें कि निवेश के वक्त दिखाई देने वाला रिटर्न मैच्योरिटी के वक्त कम हो सकता है। वैसे भी अब तक अधिकतर एफएमपी में निवेश के वक्त आंकी गई रकम मैच्योरिटी के वक्त कम ही रही है। दूसरी बात जिस पर ध्यान दें वह है पोर्टफोलियो। एफएमपी के पोर्टफोलियो देखने में अक्सर ज्यादा रिस्की नजर आते हैं। मंदी के इस दौर में डिफाल्ट का जोखिम भी काफी बढ़ गया है इसलिए निवेश से पहले पोर्टफोलियो पर अच्छी तरह नजर दौड़ा लें।
एफएमपी पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स 33 प्रतिशत की दर से लगता है जबकि लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स की दर इनडेक्सेशन के साथ 20 प्रतिशत व बगैर इनडेक्सेशन के 10 प्रतिशत (इनमें जो भी कम हो) रहती है। मुद्रास्फीति के ऊंचे स्तर पर बने रहने की पूरी संभावनाएं हैं। ऐसे में अगर आप 1 साल से ज्यादा समय के लिए निवेश करने की सोचते हैं तो एफएमपी बेहतर विकल्प होगा। इसकी वजह इस पर लगने वाले लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स की दर कम होना है।
शॉर्ट टर्म इंवेस्टमेंट में क्या करें
जो निवेशक एक साल से कम अवधि के लिए एफएमपी में निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए डिविडेंड ऑप्शन अच्छा होगा। इसकी वजह इस पर लगने वाला 14.16 प्रतिशत डीडीटी (डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स) है। बैंक के फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करने वाले एक बार इस विकल्प पर भी गौर फरमा सकते हैं। हालांकि एफएमपी थोड़े जोखिम भरे होते हैं लेकिन एफडी के मुकाबले इन पर टैक्स भी तो कम लगता है।