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खाली पदों पर फिलहाल नियुक्ति नहीं!

बिलासपुर. हाईकोर्ट में फिलहाल खाली पड़े पदों पर जजों की नियुक्ति की संभावना नहीं दिख रही है। चीफ जस्टिस आफ इंडिया के. जी बालकृष्णन ने बार कौंसिल के प्रतिनिधियों को स्पष्ट तौर पर बता दिया है कि सुप्रीम कोर्ट में छत्तीसगढ़ के लिए जजों की नियुक्ति संबंधी कोई फाइल पेंडिंग नहीं है और नई नियुक्ति के लिए हाईकोर्ट से जजों के नाम के पैनल भेजने पड़ेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जहां भी जजों के पद खाली हैं, वहां नियुक्ति की जाएगी।

हाईकोर्ट में जजों के स्वीकृत 18 पदों में से चीफ जस्टिस सहित सिर्फ सात पदों पर ही नियुक्ति हुई है। जजों के 11 पद अभी भी खाली हैं। 24 जुलाई को जस्टिस एलसी भादू के रिटायर होने के बाद यहां पर जजों की संख्या छह रह जाएगी। इसके मद्देनजर जजों की नियुक्ति जरूरी समझी जा रही है। बार कौंसिल के पदाधिकारी पिछले दिनों सीजेआई के रायपुर आगमन पर उनसे मिलने पहुंचे, तो उन्होंने यहां पर जजों की कमी के संबंध में भी चर्चा की।

इस दौरान बिलासपुर व रायपुर दोनों ही जगह के पदाधिकारी उपस्थित थे। सीजेआई ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया है कि छत्तीसगढ़ ही नहीं, देश के जिन हाईकोर्ट में जजों को पद रिक्त हैं, वहां नियुक्ति की जानी है। उन्होंने नियुक्ति के दौरान प्रक्रिया का पालन और योग्यता का ध्यान रखने के कारण कुछ देर लगने की भी कही।

बताया जा रहा है कि इस संदर्भ में उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को जानकारी दी है कि छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति संबंधी फिलहाल कोई फाइल सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग नहीं है। उन्होंने यह भी कहा है कि जजों के नामों के पैनल राज्य शासन और हाईकोर्ट को भेजने हैं। इसके बाद ही उन पर विचार करने के बाद नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। माना जा रहा है कि इसके बाद हाईकोर्ट में रिक्त पदों पर नियुक्ति के लिए प्रयास शुरू करने की जरूरत है। यहां से बार व बेंच से नामों को पैनल जाने के बाद ही यह इस दिशा में आगे पहल हो सकेगी।

बार व बेंच से होनी है नियुक्ति
हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस के अलावा छह और जज पदस्थ हैं। इनमें से चीफ जस्टिस राजीव गुप्ता सहित जस्टिस धीरेंद्र मिश्रा, जस्टिस सुनील सिन्हा, जस्टिस सतीश अग्निहोत्री बार (एडवोकेट) कोटे से और जस्टिस एलसी भादू, जस्टिस दिलीप रावसाहेब देशमुख, जस्टिस टीपी शर्मा बेंच (जज) कोटे से हैं। हाईकोर्ट में जजों के 60 प्रतिशत पद वकीलों से और 40 प्रतिशत पद जज कोटे से भरे जाते हैं। इस लिहाज से यहां 10 पद वकील कोटे और आठ पद जज कोटे से भरे जाने हैं। जस्टिस भादू के रिटायर होने के बाद दोनों ही कोटे के छह-छह पद रिक्त हो जाएंगे।

यह प्रक्रिया हाईकोर्ट से ही होनी है। वहां से नाम आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाती है। फिलहाल जजों की नियुक्ति के संबंध में कोई जानकारी नहीं है।
आरएस शर्मा, विधि सचिव, छत्तीसगढ़ शासन





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