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डाक्टरों को जाना पड़ेगा गांव में

भोपाल. मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के सदस्य डॉ. केतन देसाई ने कहा है कि एमबीबीएस की पढ़ाई के बाद जो छात्र पीजी कोर्स करना चाहते हैं, उन्हें ग्रामीण क्षेत्र में एक साल तक रहना अनिवार्य किया गया है। इसी तरह अब एमबीबीएस के लिए साढ़े चार साल की बजाय पांच साल की पढ़ाई करनी होगी।

एमसीआई के प्लेटिनम जुबली समारोह में शिरकत करने भोपाल आए डा. देसाई ने दैनिक भास्कर से खास मुलाकात में बताया कि चिकित्सा के नियम, कायदे और मापदंड तय करने वाली देश की सर्वोच्च संस्था द्वारा मेडिकल की पढ़ाई और परीक्षा के पैटर्न में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही है। इसीलिए मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने प्रावधानों में कुछ संशोधन किया है। गांवों में डाक्टरों की कमी दूर करने के उद्देश्य से पीजी कोर्स के पहले एक साल की ग्रामीण सेवा का प्रावधान अनिवार्य किया गया है।

डॉ. देसाई ने बताया कि एमबीबीएस की डिग्री अब साढ़े चार साल की बजाए पांच साल की होगी, क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले स्टूडेंट्स को इस कोर्स को समझने में तीन से छह महीने लग जाते है, जिस कारण कई प्रतिभाशाली छात्र प्रथम वर्ष पास करने में सक्षम नहीं रहते हैं।

छात्रों की इस समस्या को देखते हुए एमसीआई ने एमबीबीएस की डिग्री पांच साल करने का निर्णय लिया है। उन्होंने बताया कि एमबीबीएस में दाखिला लेने वाले छात्रों को प्रथम वर्ष की शुरूआत में तीन महीने तक कम्प्यूटर और मेडिकल केरीकुलम की ट्रेनिंग दी जाएगी, ताकि छात्रों को मेडिकल की पढ़ाई करने में किसी प्रकार की कठिनाई न हो और प्रथम वर्ष भी अच्छे अंकों से उत्तीर्ण हो सकें।

आज के डाक्टर गांवों में जाने के लिए तैयार नहीं: डॉ. शेजवार

मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया के प्लेटिनम जुबली वर्ष के तहत गांधी मेडिकलकालेज द्वारा रविवार को श्यामला हिल्स स्थित होटल जहांनुमा पैलेस में त्नचिकित्सा शिक्षा की प्रायोगिक एवं क्लीनिकल परीक्षा पद्धति में बदलावत्न विषय पर कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला के मुख्य अतिथि चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार थे।

इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज पढ़े-लिखे डाक्टर गांवों में जाने को तैयार नहीं है। इस वजह से राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन और आरसीएच प्रोग्राम का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। इसे ध्यान में रखते हुए मेडिकल काउंसिल को कुछ शार्ट कोर्सेस भी शुरू करना चाहिए, जिससे ग्रामीण इलाकों में काम करने के लिए डाक्टर तैयार हो सकें।

मेडिकल के परीक्षा पैटर्न में बदलाव की जरूरत बताते हुए, उन्होंने ग्रामीण इलाकों में चिकित्सक और उपचार की सुविधाएं बढ़ाने पर भी बल दिया। कार्यक्रम में एमसीआई प्लेटिनम जुबली समारोह के अध्यक्ष डॉ. केतन देसाई, गांधी मेडिकल कालेज के डीन डॉ. निर्भय श्रीवास्तव, आयोजन समिति के सचिव डॉ. भानु प्रकाश दुबे सहित मप्र, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ के चिकित्सा शिक्षक बड़ी संख्या में मौजूद थे। प्रारंभ में डॉ. गौरी शंकर शेजवार द्वारा डॉ. केतन देसाई को 75 गुलाबों का पुष्प गुच्छ भेंट किया गया।

आयोजन समिति के अध्यक्ष और गांधी मेडिकल कालेज के डीन डॉ. निर्भय श्रीवास्तव ने बताया कि कार्यशाला में परीक्षा का वर्तमान पैटर्न और उसमें बदलाव की जरूरत पर भी चर्चा हुई।





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