जयपुर. भाजपा सरकार ने कृषि उपज मंडी एक्ट से उस प्रावधान को ही हटा दिया है, जिसके तहत गोशालाओं को अनुदान दिया जाता है। यह प्रावधान भी उस समय हटाया गया, जब विधेयक का मसौदा मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और मुख्य सचिव तक से अनुमोदित हो चुका था। कानूनी प्रावधान हटाए जाने से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) काफी नाराज है।
कृषि उपज मंडी समितियों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाने और निजी मंडियों को बढ़ावा देकर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा का माहौल बनाने के लिए केन्द्र सरकार ने पांच साल पहले सभी राज्यों को मॉडल एक्ट बनाकर भेजा था। राज्य सरकारों को इसमें अपने हिसाब से संशोधन करना था। वर्ष 2003 में राज्य सरकार ने कुछ संशोधन के बाद इसे ज्यों का त्यों लागू कर दिया।
राज्य सरकार ने उस समय मॉडल एक्ट की धारा 48 में संविदा खेती, सीधी खरीद व्यवस्था, थोक बाजार, टर्मिनल मार्केट के संबंध में कुछ संशोधन किए थे। इस एक्ट की धारा 13 में यह प्रावधान था कि राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त गोशालाओं की मरम्मत के लिए कृषि उपज मंडी समितियां अनुदान देंगी। इसमें आय का 5 फीसदी तक अनुदान देने की व्यवस्था थी।
जब यह मसौदा एक्ट बनने के लिए गया तो इसमें से गोशालाओं को अनुदान देने संबंधी प्रावधान ही हटा दिया गया। बताया जाता है कि ऐसा कृषिमंत्री प्रभुलाल सैनी के कहने से किया गया। आरएसएस के अनुसार इस समय गोशालाओं की स्थिति अच्छी नहीं है। गोसेवा आयोग का बजट ही मात्र दो करोड़ रुपए है। ऐसे में असहाय गायों को बचाना मुश्किल है।
अनुदान के बारे में विचार ही नहीं हुआ: कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी का कहना है कि मॉडल एक्ट की धारा 48 के बारे में सरकारी स्तर पर विचार किया गया था। यह सही है कि एक्ट में गोशालाओं की मरम्मत के लिए कुछ अनुदान देने का प्रावधान अवश्य था,लेकिन उस पर विचार नहीं हुआ। वैसे गोशालाओं को अनुदान देने के लिए गो सेवा आयोग बना हुआ है। अपंग और बूढ़े पशुओं के लिए पशु सदन चल रहे हैं। मॉडल एक्ट पर अब समग्र रूप से विचार किया जा रहा है। इसमें जरूरी संशोधन किए जाएंगे। अनुदान पर भी विचार किया जा सकता है।