जयपुर.
हाल ही एसएमएस अस्पताल में न्यूरोसर्जरी के जटिल ऑपरेशन के बाद शहर के एक निजी अस्पताल के डॉक्टर ने लम्बो पेल्विक फिक्सेशन (रीढ़ की हड्डी को कूल्हे की हड्डी से जोड़ना) का ऑपरेशन करने में सफलता अर्जित की है।
लगभग 10 घंटे चले ऑपरेशन के बाद माधोपुर (कोटा) के 42 वर्षीय राधेश्याम राजपूत तीन महीने बाद चारपाई छोड़कर फिर से पैरों पर चलने लायक हो गए हैं। राधेश्याम की रीढ़ की हड्डी में कैंसर की गांठ होने से हड्डी गल चुकी थी, जिससे रीढ़ की हड्डी का कनेक्शन शरीर के निचले हिस्से से कमजोर पड़ गया था।
बड़ोदरा और मुंबई के डॉक्टरों ने भी हाथ खींच लिए थे, पर शहर के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. कमल गोयल ने रिस्क उठाकर राधेश्याम को जीवन दिया।
..और राधेश्याम खड़े हो गए
बकौल डॉ. गोयल, मरीज के साइक्रम (रीढ़ की हड्डी का सबसे नीचे वाला पार्ट, जो कूल्हे की हड्डी से जुड़ता है) में कैंसर की गांठ होने से यह हिस्सा गल गया था। ऐसे ट्यूमर में ब्लड सप्लाई बहुत ज्यादा होती है। इसी वजह से ऑपरेशन के दौरान मरीज को लगभग 20 यूनिट खून देना पड़ा, वहीं 8 स्क्रू लगाकर रीढ़ की हड्डी को कूल्हे की हड्डी से जोड़ा गया, जिसमें बड़ा रिस्क था, लेकिन इंग्लैंड में इसी तरह के दो-तीन ऑपरेशन का अनुभव काम आया।
उन्होंने दावा किया कि राजस्थान में अपनी तरह का यह पहला ऑपरेशन था। राधेश्याम ने बताया कि झुकी हुई कमर और असहनीय पीड़ा से मैं त्रस्त था। ऑपरेशन के एक सप्ताह बाद ही मैं पहले की अपेक्षा आसानी से चल-फिर सकता हूं।